मोहम्मद अहमद ने लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरटीओ की वेबसाइट पर आवेदन किया था। ऑनलाइन टेस्ट शुरू हुआ तो वे क्लीन शेव थे। मगर, दो मिनट के भीतर ही उनके चेहरे पर लंबी दाढ़ी नजर आने लगी। पड़ताल में पता लगा कि ऑनलाइन टेस्ट में पास होने के लिए मूल आवेदक की जगह कोई दूसरा आकर कम्प्यूटर के सामने बैठ गया है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले टेस्ट में पास होने केलिए लोग तमाम हथकंडे अपनाते हैं। कई लोग पकड़े जाने पर फेल भी कर दिए जाते हैं। परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाना होता है। इसके लिए तीन सौ रुपये फीस है और लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए आरटीओ कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। घर से ही वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर फीस जमा कर सकते हैं।
इसके बाद ऑनलाइन टेस्ट होता है, जिसमें पंद्रह सवाल पूछे जाते हैं और इसमें नौ सवालों के सही जवाब देने जरूरी होते हैं। मगर ऑनलाइन टेस्ट के दौरान आवेदक घालमेल करते हैं। कई लोग नकल करते पकड़े जाते हैं। लर्निंग लाइसेंस के लिए डेढ़ सौ आवेदक रोजाना टेस्ट देते हैं, जिसमें 25 से 30 फेल हो जाते हैं। इसमें नकल करने वाले भी शामिल हैं।
एआरटीओ प्रशासन अखिलेश द्विवेदी ने बताया कि लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदकों को ऑनलाइन टेस्ट देना होता है, जिसकी मॉनिटरिंग की जाती है। चूंकि, ऑनलाइन टेस्ट के दौरान घर पर आवेदक अगर पीछे भी मुड़ता है तो कम्प्यूटर उसे पकड़ लेता है, इसलिए तीन बार गलतियों को माफ किया जाता है। इससे अधिक बार होने पर आवेदक को फेल कर दिया जाता है। फेल होने के बाद आवेदक को नए सिरे से आवेदन करना पड़ता है।