गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त में हुई बच्चों की मौत मामले में कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डा. कुशवाहा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। वहीं, मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. कुशवाहा ने कहा कि इस पर ठीक से जांच नहीं हुई है।
ये लगे हैं आरोप
शुक्रवार को कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा, डॉ. एपी सिंह, डॉ. एके श्रीवास्तव, मुख्य कोषाधिकारी विनोद, वित्त नियंत्रक नीरज कुमार की भूमिका ऑक्सीजन सप्लाई के अनुबंध में संदिग्ध मानते हुए इनसे जुड़े साक्ष्य जुटाने के लिए विवेचना जारी रखने की बात कही थी।
पुलिस का कहना है कि शुरू से कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई की टेंडर कमेटी में ये पांचों लोग शामिल थे। इनकी देखरेख में जो टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई उसमें ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाली आइनॉक्स कंपनी से सीधे अनुबंध करने की बजाय पुष्पा सेल्स को बिचौलिया बनाकर ऑक्सीजन सप्लाई की जिम्मेदारी दी गई। ऐसा करना प्रथम दृष्टया अनियमितता दर्शाता है। इसमें इन पांच की भूमिका संदिग्ध है। उस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई की कोई लॉग बुक भी नहीं बन रही थी। न ही कोई रिकॉर्ड मौजूद है।
डा. कुशवाहा ने दिया ये जवाब
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट मामले की पुलिस की चार्जशीट में नाम आने पर पूर्व प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा ने जांच ठीक से न होने की बात कही। पुलिस की चार्जशीट में ऑक्सीजन सप्लाई का टेंडर लिक्विड ऑक्सीजन तैयार करने वाली कंपनी से न करके बिचौलिया फर्म पुष्पा सेल्स के साथ अनुबंध करने पर पूर्व प्राचार्य समेत चार अन्य की भूमिका को संदिग्ध मानकर आगे विवेचना की बात पर शनिवार को डॉ. केपी कुशवाहा की प्रतिक्रिया ली तो उन्होंने ऐसा ही कहा। हालांकि, इससे अपनी छवि को धक्का लगने पर उन्होंने दुख जताया।