केस 2- आमतौर पर हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए होने वाले सीके एमबी टेस्ट के लिए केजीएमयू में कई सालों से 250 रुपये लिए जाते थे। अब इसकी फीस 230 रुपये कर दी गई है। इसका आधार पीजीआई की कीमतें थीं। हालांकि, वहां इसकी फीस अभी भी 80 रुपये ही है।
केस 3- पथरी, पेट में छाले, बुखार, उल्टी, पीलिया, पित्त की थैली की सेरम एमाइलेज जांच होती है। केजीएमयू में इसकी फीस 250 से अब 200 रुपये कर दी गई है। वहीं, पीजीआई में इस टेस्ट के वही एजेंसी 50 रुपये लेती है।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बीते दिनों निजी एजेंसी के माध्यम से होने वाली सभी जांचों का शुल्क 15 फीसदी तक कम किया गया। कार्य परिषद से इसे पास कर लागू भी किया गया। इसका आधार पीजीआई में जांच की फीस को बनाया गया। तर्क था कि वहां के बराबर केजीएमयू में जांचों की फीस होनी चाहिए, लेकिन अभी भी कई टेस्ट ऐसे हैं जिनके लिए केजीएमयू में पीजीआई के मुकाबले चार गुना तक ज्यादा शुल्क वसूला जा रहा है।
केजीएमयू में पैथालॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोडाग्यनोसिस की काफी जांचें निजी एजेंसी के सहयोग से होती हैं। इनका शुल्क केजीएमयू एजेंसी के साथ मिलकर तय करता है। इसके बावजूद मरीजों पर महंगी जांचों का भार है। केजीएमयू में डॉक्टर से परामर्श भले ही एक रुपये के पर्चे पर मिल जाता हो, लेकिन इसके बाद जांच और दवाओं का बोझ उसकी जेब पर पड़ता है। सरकारी अनुदान मिलने के बावजूद केजीएमयू में टेस्ट काफी महंगे हैं। उधर, पीजीआई पूरा भुगतान लेकर इलाज करने वाली संस्था है। इसके बावजूद केजीएमयू में पीजीआई के मुकाबले काफी टेस्ट चार गुना तक कीमत पर किए जाते हैं, जिसका पूरा भार मरीजों पर आता है।