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अंसल के वाइस चेयरमैन व दो अधिकारियों के मुकदमों में चार्जशीट दाखिल

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अंसल एपीआई के वाइस चेयरमैन प्रणव अंसल और दो प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
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अंसल एपीआई के वाइस चेयरमैन प्रणव अंसल और दो प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ विभूतिखंड पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है।
कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में पुलिस ने प्रणव अंसल, अरुण कुमार मिश्रा और हरीश गुल्ला को धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज तैयार करने व लोगों से जमीन व फ्लैट के नाम से करोड़ों रुपये ठगने के आरोप को सही बताया है।
इसके लिए पुलिस ने कोर्ट में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी दाखिल किए हैं। विभूतिखंड पुलिस ने अंसल एपीआई के वाइसचेयरमैन प्रणव अंसल को 29 सितंबर को दिल्ली के इंदिरागांधी हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था।
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उस वक्त वह लंदन जाने के लिए फ्लाइट पकड़ने जा रहा था। लखनऊ पुलिस ने अंसल एपीआई के चेयरमैन सुशील अंसल और वाइस चेयरमैन प्रणव अंसल सहित कई अधिकारियों के खिलाफ जुलाई में लुकआउट नोटिस जारी किया था।
इसी नोटिस के तहत प्रणव को इंदिरागांधी एयरपोर्ट के अथॉरिटी ने रोक लिया था और पासपोर्ट जब्त कर लिए। इसके बाद लखनऊ पुलिस को सूचना दी।
विभूतिखंड इंस्पेक्टर राजीव द्विवेदी की टीम ने 29 सितंबर की शाम को प्रणव अंसल को गिरफ्तार कर लखनऊ लाई। जहां देर रात कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।
उधर, पुलिस के अनुसार विभूतिखंड थाने में दर्ज दो मुकदमों में चेयरमैन सुशील अंसल भी आरोपी हैं, उनकी तलाश भी पुलिस ने तेज कर दी है। वहीं जमानत पर रिहा कंपनी के दो अधिकारियों को कोर्ट से अनुमति लेकर फिर से जेल भेजा जाएगा।
यह आरोप पत्र दाखिल किया
विभूतिखंड प्रभारी निरीक्षक राजीव द्विवेदी के मुताबिक, अंसल एपीआई ग्रुप के खिलाफ दर्ज मुकदमे में ज्ञानेंद्र कुमार विवेचक है। उन्होंने बृहस्पतिवार को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। जिसमें प्लॉट व फ्लैट के नाम पर करोड़ाें रुपये हड़पने, धमकाने, जालसाजी और जाली दस्तावेज तैयार करने जैसे अपराध साबित होते हैं। उनके खिलाफ इन आरोपों के पुख्ता सबूत हैं। जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, अरुण मिश्रा नेहरू एन्क्लेव में रहते हैं। वहीं, प्रणव अंसल और हरीश गुल्ला दिल्ली के बाराखंभा रोड पर रहते हैं।
जाली नक्शा दिखाकर ठगते
पुलिस के मुताबिक, अंसल ग्रुप द्वारा जमीन दिखाने के पहले एक नक्शा ग्राहकों के सामने रखा जाता। इसमें प्लॉट दिखाए जाते। पुलिस के अनुसार, जमीन कंपनी ने न तो खरीदी है और न ही उस पर कब्जा है। उस जमीन को भी अपना बताकर नक्शे में दिखाते। ताकि ग्राहकों को लगे कंपनी का बड़ा कारोबार है। वह धोखा नहीं कर सकते हैं। नक्शे में कई ऐसे प्लॉट भी दिखाए गए हैं जो पहले बेचे भी जा चुके हैं। अंसल ग्रुप के पुराने नक्शे को लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनुमोदित किया है। इन सभी जमीनों को बेच भी चुके हैं। पिछले कुछ सालोें से जो नक्शा दिखाकर ग्राहकों से धोखाधड़ी की जा रही है। उनका नक्शा पास ही नहीं है।
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किसानों के नाम की जमीन की कर दी रजिस्ट्री
एसएसपी के मुताबिक , अंसल ग्रुप ने किसानों के नाम से दर्ज जमीनों को भी बेच दिया। उसकी रजिस्ट्री भी कर दी। किसानों से एग्रीमेंट में यह दर्ज किया गया है कि जब जमीन दूसरे को बेचने योग्य होगी तो किसान द्वारा अंसल ग्रुप को बेची जाएगी। पुलिस के मुताबिक, इस तरह एग्रीमेंट गैर कानूनी है। इस तरह की जमीन का अनुबंध किसान द्वारा नहीं किया जा सकता है। ऐसी ही जमीनों पर ग्राहकों को बिना मालिकाना हक के ही अंसल ग्रुप ने रजिस्ट्री कर दी।
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