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चारबाग स्टेशन आउटर को फोरलेन करने के लिए नाप-जोख शुरू, खर्च होंगे करोड़ों रुपये

Mon, 09 Nov 2020 01:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : File Photo
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चारबाग रेलवे स्टेशन पर जल्द ही ट्रेनों को आउटर पर खड़ा रखने के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। 98 करोड़ की लागत से आउटर को फोरलेन का करने की कवायद शुरू हो गई है। नाप-जोख के साथ फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है। 
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चारबाग स्टेशन से बाराबंकी, रायबरेली की ओर जाने वाली गाड़ियों को दिलकुशा केबिन आउटर से गुजरना पड़ता है। जबकि दूसरी ओर आलमनगर केबिन है। दिलकुशा और आलमनगर चारबाग के आउटर हैं, जिनसे होकर गाड़ियां चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंचती हैं। चारबाग से इन आउटर के लिए अभी डबल लाइन है, जिसे फोरलेन करने का प्रोजेक्ट रेलवे बोर्ड की ओर से तैयार किया गया था।

ताकि गाड़ियों को आउटर पर खड़ा ना करना पड़े। इसके लिए बजट में 98 करोड़ रुपये भी दिए गए। लेकिन आउटर को 4 लेन करने का काम लंबे समय तक अटका रहा। अब उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम संजय त्रिपाठी के नेतृत्व में आउटर को चार लाइन करने का काम तेज कर दिया गया है। आउटर के फोरलेन हो जाने से गाड़ियों की आवाजाही आसान हो जाएगी और यात्रियों को राहत मिलेगी। 
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इतना लोड है चारबाग पर

चारबाग रेलवे स्टेशन पर आम दिनों में यात्रियों और ट्रेनों का बहुत लोड रहता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार चारबाग स्टेशन पर 282 ट्रेनों से रोजाना सवा लाख यात्रियों का आवागमन होता है। वहीं लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर 45 गाड़ियों से 90 हजार के आसपास यात्रियों की आवाजाही होती है। 

करनी होगी मशक्कत
आउटर फोरलेन के लिए उत्तर रेलवे के इंजीनियरों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। दिलकुशा केबिन से चारबाग की ओर आने पर तीन पुल पड़ते हैं। इन पुलों पर फोरलेन पटरियों के लिए जगह ही नहीं है, जिसका विकल्प तलाशना होगा। वहीं पटरी किनारे बसी आबादी भी इंजीनियरों के लिए मुसीबत बनेगी।

फिलहाल चारबाग बिजी तो आउटर पर करना पड़ता है ट्रेनों को इंतजार
आम दिनों में चारबाग रेलवे स्टेशन शाम के वक्त काफी बिजी रहता है। बाराबंकी व कानपुर की ओर से आने वाली गाड़ियों को दिलकुशा केबिन और आलमनगर आउटर पर रोकना पड़ता है। चारबाग पर जब ट्रैक खाली होते हैं तब गाड़ियों को ग्रीन सिग्नल मिलता है। 
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