हिंसा बढ़ती देख पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। करीब पांच राउंड आंसू गैस के गोले दागने पर भीड़ बिखरी और ग्रामीण पीछे भागे। इसके बाद पीएसी बल को मौके पर बुलाया गया। डीसीपी उत्तरी भी पहुंचे और ग्रामीणों से बात करने का प्रयास किया, लेकिन लोग नहीं माने।
विधायक को भी लौटना पड़ा वापस
बीकेटी विधायक योगेश शुक्ला ने भी गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बात करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों के पास पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। बवाल बढ़ता देख विधायक को पुलिस बल के साथ वापस लौटना पड़ा। ग्रामीण लगातार नारेबाजी करते रहे और किसी को भी प्रतिमा स्थल पर जाने नहीं दिया। पुलिस बल गांव के बाहर मुस्तैद रही।
महिंगवा, इटौंजा और बीकेटी पुलिस व पीएसी के पहुंचने पर भी स्थिति नियंत्रित नहीं हुई। इसके बाद मड़ियांव, सैरपुर, गुडंबा, जानकीपुरम, इंदिरानगर, महिला थाना बीकेटी की फोर्स को बुलाया गया। एसीपी अमोल मुरकुट, एडीसीपी जितेंद्र दुबे, डीसीपी गोपाल चौधरी दलबल के साथ पहुंचे। सुबह नौ बजे शुरू हुआ विवाद शनिवार रात तक जारी रहा। नगर पंचायत बीकेटी के चेयरमैन गणेश रावत की बात भी ग्रामीणों ने नहीं मानी।
बिना अनुमति स्थापित कर दी प्रतिमा
बीकेटी एसडीएम सतीश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि सुबह ही ग्रामीणों से कहा गया था कि बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकती। ऐसे में प्रतिमा को हटाना पड़ेगा। इसके बावजूद ग्रामीण नहीं माने और पथराव किया। गांव में फोर्स तैनात है। रात तक मामला शांत नहीं हो सका।
कई ग्रामीणों को भी आईं चोटें
हंगामा और पथराव में कई ग्रामीण भी घायल हुए हैं। सावित्री को ज्यादा चोट आई, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। इसके अलावा कोमल, रूबी, मुन्नी, सरोजनी, सुरेंद्र, कुसमी, सुभाष, कृष्णावती और होलिका चोटिल हैं।