जिला पंचायत अध्यक्षों या ब्लॉक प्रमुखों के आरक्षण के लिए सबसे पहले जिला पंचायतों को एसटी, एससी और ओबीसी की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में सूचीबद्ध किया जाएगा। इनमें 1995 से 2015 तक आरक्षण की स्थिति देखकर फिर से इन वर्गों के लिए आरक्षित नहीं किया जाएगा।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में एससी की जनसंख्या 0.57 प्रतिशत है अर्थात जिला पंचायत में शून्य पद हैं, जबकि आबादी 20.69 प्रतिशत के अनुसार जिला पंचायत अध्यक्ष के 16 पद आरक्षित रहेंगे। ओबीसी का 27 फीसदी आरक्षण है। जिला पंचायत अध्यक्ष के 20 पद पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगे। हर क्षेणी में 33 प्रतिशत (कुल 25) पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।
ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य का आरक्षण तय करने में पिछले 25 सालों के आरक्षण को आधार नहीं बनाया जाएगा। वर्ष 2015 में जो ग्राम पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी, उस पर उसका आरक्षण नहीं होगा। पिछले साल के आरक्षण से आगे चक्रानुक्रम में सीट तय की जाएंगी। चक्रानुक्रम की शुरुआत एसटी की महिलाओं से होती है।
इसके बाद एससी, एससी महिलाएं, ओबीसी महिलाएं, ओबीसी के लिए आरक्षित की जाती हैं। यदि कोई ग्राम पंचायत 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी तो इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होगी।
नया निर्वाचन क्षेत्र तभी जब 50 फीसदी से ज्यादा बदलाव
नए नगरीय निकायों के गठन या उनके सीमा विस्तार से यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में 50 फीसदी से अधिक परिवारों का बदलाव हुआ तो उसे नया वार्ड माना जाएगा। तभी उस पर नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण होगा।