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टीबी मरीजों के इलाज का बदला पैटर्न, जनवरी से होगा लागू, इस नंबर से लें मदद

Wed, 09 Oct 2019 03:40 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
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केस 1

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आलमबाग निवासी महिला को एमडीआर टीबी है। उसे प्रतिदिन दवाओं के साथ इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। लगातार इंजेक्शन लगवाने से उसे दिक्कत होने लगी। कुछ दिन बाद जांच कराई तो पता चला कि उसकी किडनी भी प्रभावित हो रही है। इसकी जानकारी मिलने पर उसने इंजेक्शन लगवाने से मना कर दिया। वह डॉक्टर के पास आई और इंजेक्शन के बजाय दवाओं की मांग करने लगी।

केस 2
सीतापुर निवासी सरोज (45) को एक्सडीआर टीबी होने पर इंजेक्शन लगता है। उसका भाई साइकिल पर बैठाकर करीब दो किलोमीटर दूर बाजार में एक डॉक्टर के पास उसे इंजेक्शन लगवाने रोज ले जाता है। इससे उसकी कमर पर सूजन आ गई। कुछ दिन बाद उसे चक्कर आने लगे। कान से कम सुनाई पड़ने लगा।
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एमडीआर टीबी से ग्रसित कन्नू (35) को रोज सुबह इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। उसकी बांह से लेकर कमर तक छिद गई है। रोज-रोज के इंजेक्शन से उसे तेज दर्द होता है। कभी बोतल में पानी भरकर सिंकाई करता है तो कभी कपड़े से। फिर भी उसे राहत नहीं मिलती। उसके कान से कम सुनाई पड़ने लगा है।
 

बिना इंजेक्शन के किया जाएगा इलाज

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कन्नू की तरह ही एमडीआर और एक्सडीआर टीबी से ग्रसित अन्य मरीजों के लिए भी इंजेक्शन लगवाना बड़ी समस्या है। इस समस्या को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने इलाज का पैटर्न ही बदल दिया है। अब मरीजों का इलाज बिना इंजेक्शन के किया जाएगा। उम्मीद है कि जनवरी से यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

इस संबंध में डब्ल्यूएचओ की ओर से एनआईटीआरडी में आयोजित बैठक में सभी नोडल सेंटर प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। यूपी में करीब 4,79,446  टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 15 हजार मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट  (एमडीआर) और 1600  एक्सडीआर के मरीज हैं।

राजधानी में 12500 मरीज हैं, जिसमें एमडीआर के 550 और स्ट्रीम ड्रग रेजिस्टेंस के 60 मरीज हैं। प्रदेश में अभी 2021 डीएमसीएस व 141 सीबीएनएएटी लैब हैं। अभी तक एमडीआर और एक्सडीआर टीबी के मरीजों के उपचार में 7-8 दवाओं के बीच ग्रुप बनाया जाता था।

पिछले सप्ताह नई दिल्ली नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्यूबरकुलोसिस एंड रेस्पेरेटरी डिजीज में यूपी के 15 नोडल प्रभारियों सहित विभिन्न प्रदेशों के नोडल प्रभारियों की बैठक बुलाई गई। इस बैठक में हिस्सा लेने वाले केजीएमयू के एसोसिएट प्रोफेसर और नोडल प्रभारी डॉ. दर्शन बजाज ने बताया कि इसमें टीबी मरीजों के इलाज में आने वाली दुश्वारियों पर चर्चा हुई।
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ग्रामीण इलाके के मरीजों को इंजेक्शन लगवाने में दिक्कत

प्रतीकात्मक तस्वीर
डॉ. बजाज ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने करीब 13 हजार मरीजों पर सर्वे कराया। इसमें कान से कम सुनाई पड़ना और बाद में उसकी रिकवरी न होने, किडनी की समस्या होने की शिकायतें मिलीं। सबसे ज्यादा दिक्कत ग्रामीण इलाके के मरीजों को इंजेक्शन लगवाने में होती है

यहां से लें मदद
राष्ट्रीय टीबी हेल्प लाइन नंबर-1800116666

बदला इलाज का पैटर्न
डॉ. दर्शन बजाज ने बताया कि अभी तक एमडीआर में छह से नौ माह तक और एक्सडीआर में छह से 12 माह तक प्रतिदिन इंजेक्शन देना पड़ता है। अब इसे बंद किया जा रहा है। इलाज के लिए दवाओं के तीन ग्रुप बनाए गए हैं। इन ग्रुप से चार जरूरी दवाएं दी जाएंगी। एमडीआर में पांच दवाएं दी जाएंगी। पहले दवाएं 24 से 30 माह चलती थीं, लेकिन अब इन्हें 18 से 20 माह तक ही दिया जाएगा।
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