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अभिनवगुप्त संस्थान में पीएचडी के साथ पीजी कोर्स में भी होंगे दाखिले, संस्थान के भवन निर्माण के लिए 2.96 करोड़ रुपये के साथ ही आठ पद भी हुए हैं स्वीकृत

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लखनऊ विश्वविद्यालय के अभिनवगुप्त संस्थान में इसी सत्र से पाठ्यक्रमों की शुरुआत हो जाएगी। इनमें पीएचडी तो होगी ही, साथ ही परास्नातक स्तर के दो पाठ्यक्रम भी होंगे। इस बात पर मंथन चल रहा है कि पीएचडी के अलावा दोनों पाठ्यक्रम डिग्री हों या फिर एक डिप्लोमा और डिग्री रखा जाए। लविवि को तीन साल पहले प्रदेश सरकार से संस्थान के लिए अनुदान मिला था पर अभी तक इसके दाखिले शुरू नहीं हुए थे। लविवि की आवेदन प्रक्रिया नौ मार्च से शुरू होगी। इसमें संस्थान के पाठ्यक्रम भी शामिल किए जा रहे हैं।
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लविवि को अभिनवगुप्त संस्थान के लिए नये भवन निर्माण के लिए 2.96 करोड़ रुपये के साथ ही आठ पद भी स्वीकृत हुए हैं। इनमें एक पद प्रोफेसर-निदेशक का, दो पद असिस्टेंट प्रोफेसर के, एक पद रिसर्च फेलो, दो पद कर्मचारी, एक पद मल्टीटास्किंग और एक पद सफाई कर्मचारी का है। शोधपीठ में पुरोहित, तंत्र, संस्कृत साहित्य, कला और संगीत पर आधारित पाठ्यक्रमों का संचालन होना है। तंत्र, संस्कृत साहित्य, कला और संगीत के प्रकांड विद्वान अभिनवगुप्त के कार्यों तथा उनके द्वारा लिखे गए ग्रंथों पर शोध कार्य भी इस संस्थान के माध्यम से होंगे।
अन्य शोधपीठ में अभी भी बनाई जा रही है योजना
अभिनवगुप्त संस्थान में पाठ्यक्रम संचालन को हरी झंडी मिल चुकी है, वहीं अन्य शोधपीठ को लेकर अभी भी योजना ही बनाई जा रही है। विवि को पिछले चार साल में छह शोधपीठ के लिए 13 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। ये शोधपीठ लोहिया, दीनदयाल उपाध्याय, भाऊराव देवरस, अटल बिहारी वाजपेयी, महात्मा गांधी और अभिनवगुप्त जैसे महापुरुषों के नाम पर हैं। प्रदेश सरकार से अभिनव गुप्त संस्थान के लिए तीन करोड़ रुपये तथा बाकी के लिए दो-दो करोड़ रुपये मिले हैं। इनका बजट मिले हुए भी काफी समय बीत चुका है, लेकिन इन शोधपीठ में शोध के लिए कोई विशेष गतिविधि शुरू नहीं हुई है।
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विभागों ने भेजी पीएचडी सीट की संख्या
लविवि में पीएचडी दाखिले के लिए सीट संख्या देने की अंतिम तारीख बृहस्पतिवार को समाप्त हो गई। कुछ विभागों को छोड़कर बाकी ने अपनी सीट संख्या भेज दी है। प्रवेश टीम के अनुसार अभी तक सीट कंपाइल नहीं हुई हैं। शनिवार को यह काम किया जाएगा।
अभिनवगुप्त संस्थान के माध्यम से इस साल पीएचडी के साथ ही अन्य पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इससे अभिनवगुप्त जैसी शख्सियत तथा उनके कामों पर शोध हो सकेगा। लविवि के आवेदन फॉर्म में इनको शामिल किया जा रहा है।
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- प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति, लविवि
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