अखिलेश सरकार में ही दरोगा के 3307 पदों के लिए 2016 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए 6.30 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। यह भर्ती ऑनलाइन परीक्षा से कराई जानी थी। परीक्षा की तिथि घोषित होती, इससे पहले प्रदेश में चुनाव घोषित हो गया। चुनाव बाद सरकार बदली लेकिन भर्ती प्रक्रिया जारी रही।
जुलाई में ऑनलाइन परीक्षा शुरू हुई लेकिन चार दिन बाद पेपर लीक के कारण परीक्षा निरस्त कर दी गई। पांच महीने की मशक्कत के बाद 12 दिसंबर से 23 दिसंबर तक दोबारा ऑनलाइन परीक्षा हुई, लेकिन अब तक परिणाम घोषित नहीं हो सका है।
भर्ती बोर्ड के चेयरमैन जीपी शर्मा का कहना है कि वर्ष 2016 दरोगा भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा को लेकर कई आपत्तियां आई थीं जिनका निराकरण परीक्षा कराने वाली एजेंसी ने किया है। जल्द ही दस्तावेजों के सत्यापन और फिजिकल टेस्ट के लिए सूची जारी करेंगे। सिपाही भर्ती 2015 की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी जल्द ही मेरिट सूची जारी की जाएगी।
2018 में शुरू हुई 41520 सिपाहियों की भर्ती के लिए 23 लाख से अधिक आवेदन आए हैं। इनकी ऑफलाइन परीक्षा की व्यवस्था कराई जा रही है। परीक्षा अक्तूबर में कराए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल पत्र के बारे में उन्होंने कहा कि यह फर्जी है।
चार साल में डेढ़ लाख भर्ती कैसे होगी, के सवाल पर शर्मा ने कहा, जल्द ही वर्ष 2015 वाली 34716 सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होगी। 2015 वालों की ट्रेनिंग पूरी होगी, तब तक 2018 की भर्ती वालों का रिजल्ट आ चुका होगा और वे ट्रेनिंग पर जाएंगे।
हमारा प्रयास है कि पारदर्शी और त्रुटिरहित परिणाम आएं, जिससे लोगों को न्यायालय में जाने का मौका न मिले। 2016 की दरोगा भर्ती प्रक्रिया में थोड़ी देर हो रही है। इस मामले में 15 याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं, लेकिन बोर्ड के प्रयास से सभी याचिकाएं खारिज हो गई हैं।