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'सोशल मीडिया साइट्स पर भारत में बने प्रोटोकॉल'

Mon, 19 Jan 2015 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री की मौजूदगी में सोमवार को सोशल मीडिया साइट्स पर नियंत्रण का मुद्दा भी उठा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि जिन सोशल साइट्स के सर्वर विदेशों में है, उनको नियंत्रित करने के लिए उनके सर्वर अनिवार्य रूप से भारत में भी होने चाहिए।
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दूसरे राज्यों ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा कि संचार माध्यमों से इंटरनेट के उपयोग के संबंध में भारत सरकार को प्रोटोकॉल बनना चाहिए।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक राजधानी में केद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, कई मंत्री, चारों राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्र सरकार व राज्य सरकारों के अधिकारी मौजूद थे। बैठक के एजेंडे में 35 बिंदु थे, इसमें से कई पर पर चारों राज्यों में सहमति भी बनी।

नक्सल समस्या से निपटने को मांगा फंड:
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने लेफ्ट विंग एक्स्ट्रीमिज्म (नक्सल समस्या) से निपटने के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। इसके लिए 90: 10 के अनुपात में केंद्र से मदद मिलनी चाहिए।
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कई बार केंद्रीय बलों की तैनाती का खर्च भी राज्य से ले लिया जाता है। अन्य राज्यों ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया। यूपी ने कहा कि प्रदेश में तीन जिले नक्सल समस्या से ज्यादा प्रभावित हैं।

आठवीं कक्षा तक की परीक्षा अनिवार्य हो

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून में बदलाव की मांग उठी। केंद्रीय गृहमंत्री की मौजूदगी में सोमवार को हुई बैठक में चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एकसुर से कहा कि आठवीं कक्षा तक परीक्षा अनिवार्य की जाए।

मुख्यमंत्रियों की दलील है कि ऐसा न होने से प्रारंभिक शिक्षा का स्तर गिर रहा है। आरटीई के मौजूदा प्रावधानों के तहत के तहत आठवीं तक किसी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता। गृहमंत्री ने उनका सुझाव मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। सभी राज्यों ने मॉडल स्कूलों में छात्रावासों के निर्माण की भी मांग की।

यूपी-उत्तराखंड में परिसंपत्ति बंटवारे का मुद्दा उठा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का मुद्दा उठाया। इस मुद्दे पर दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की कमेटी बना दी गई जो शीघ्र बैठक करके परिसंपत्तियों के बारे में फैसला करेगी।

यूपी में सड़कों का जाल बिछाने की मांग

सभी राज्यों ने सड़कों का घनत्व बढ़ाने पर जोर दिया। यह मुद्दा छत्तीसगढ़ ने उठाया जहां सड़के बेहद कम हैं। यूपी, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड ने भी इस सड़कों की कमी बताते हुए और सड़के बनवाने पर जोर दिया।

यूपी की ओर से कहा गया कि पूरे देश में प्रति लाख आबादी पर 5.6 किमी हाईवे हैं लेकिन यूपी में केवल 3.9 किमी हाईवे है। इनकी लंबाई बढ़नी चाहिए।

लंबित राजमार्गों पर तेजी से काम कराया जाए और इसकी लगातार निगरानी की जाए। राजनाथ सिंह ने कहा कि वह ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के साथ इस मुद्दे पर बात करेंगे।

फोरेस्ट क्लीयरेंस सरल की जाए
सभी राज्यों ने वन संरक्षण अधिनियम को शिथिल करने पर जोर दिया। छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड का कहना था कि फारेस्ट क्लीयरेंस के कारण उनके तमाम प्रोजेक्ट लटके हुए हैं।

यूपी और मध्य प्रदेश ने भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया। लघु खनन (माइन माइन्स) भी इस एक्ट की परिधि में आते हैं। एक्ट को पांच हेक्टेयर से ऊपर ही लागू किया जाए।
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राज्यों ने मांगा कैंपा फंड का अधिकार

राज्यों ने वन क्षेत्र से बेदखल किए गए लोगों को दिए जाने वाले कैंपा (कंपेंसेटरी एफोरेस्टेशन फंड मैनेजमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी) के फंड का अधिकार मांगा। चारों राज्यों ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि राज्य सरकार अलग खाते में यह पैसा रखे और भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार उसका उपयोग करे।

यूपी-यूके में हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट पर सहमति
हरीश रावत ने जामरानी में हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट बनाने का मामला उठाते हुए यूपी से सहयोग की अपेक्षा जताई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तत्काल इस पर सहमति जता दी। दोनों राज्यों के मुख्य सचिव 15 दिन में बैठक कर इस मुद्दे पर वार्ता करेंगे।

ओवरब्रिज बनने पर बंद की जाए रेलवे क्रॉसिंग
बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि जहां रेल लाइनों पर ओवर ब्रिज बन गए हैं, वहां रेवले क्रासिंग को बंद कराया जाए। गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से रेल मंत्रालय से बात करने का आश्वासन दिया।

राइस मिलर्स का मिलिंग रेट बढ़ाया जाए
सभी राज्य इस मत के थे कि राइस मिलों से चावल निकालने का रेट लंबे समय से नहीं बढ़ा है। अभी भी मिलिंग दर 10 रुपये क्विंटल चली आ रही है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। इससे मिलर्स के सामने दिक्कतें आ रही हैं।

भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय के सचिव ने कहा कि मिलिंग रिव्यू करने के लिए कमीशन बना हुआ है। राज्य कमीशन को इस आशय का प्रस्ताव भेजें।
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