प्रदेश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधार के लिए केंद्र ने करीब 12 हजार करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी है।
दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण के लिए 6,943 करोड़ तथा समन्वित विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत 4900 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई है। नवंबर तक राज्य सरकार को यह रकम मिलने की उम्मीद है।
केंद्र से योजनाओं की मंजूरी मिलने के बाद पावर कॉर्पोरेशन ने टेंडर आदि की औपचारिकता पूरी करनी शुरू कर दी है। वहीं इन योजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार की ओर से भी बिजली कंपनियों को अंशपूंजी उपलब्ध कराने को हरी झंडी मिल गई है।
राज्य सरकार ने अक्तूबर 2016 से गांवों को कम से कम 16 और शहरों को 22 घंटे बिजली आपूर्ति का ऐलान किया है। इसमें एक बड़ी अड़चन वितरण एवं ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए बजट की कमी की है।
इस धन से इस तरह होगा काम
नेटवर्क के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के लिए पावर कॉर्पोरेशन की ओर से केंद्र को अलग-अलग प्रस्ताव भेजकर दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 7000 करोड़ तथा आईपीडीएस के तहत 5200 करोड़ की मांग की गई थी।
पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 6,943 करोड़ तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 4900 करोड़ रुपये की योजनाओं की मंजूरी मिली है। इस धन से शहरी व ग्रामीम क्षेत्रों में 33/11 केवी क्षमता के नए उपकेंद्रों के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि से लेकर 5000 तक की आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों की स्थापना आदि के काम कराए जाएंगे।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं घरेलू फीडर अलग करने तथा मीटरिंग का काम भी प्रस्तावित है। सरकार की घोषणा के अनुसार गांवों और शहरों को ज्यादा बिजली देने के लिए 33/11 केवी के 556 उपकेंद्रों का निर्माण प्रस्तावित है।
इन्हें सितंबर 2016 तक पूरा कराया जाना है। इसके अलावा मौजूदा 850 उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि भी की जानी है।
साथ ही 765 केवी, 400 केवी, 220 केवी,132 केवी के सौ से ज्यादा ट्रांसमिशन उपकेंद्रों एवं उससे संबंधित लाइनों का निर्माण कराया जाना है। करीब 50 ट्रांसमिशन उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि भी होनी है।
कृषि एवं घरेलू फीडर होंगे अलग
दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत पहले चरण में 3100 करोड़ रुपये की लागत से बागपत, बिजनौर, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, जेपीनगर, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, संभल, शामली, गाजीपुर, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थनगर, कौशांबी, आगरा, औरेया, अलीगढ़, इटावा, फीरोजाबाद, कन्नौज, मैनपुरी, मथुरा, महामायानगर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रूखाबाद, लखनऊ, बदायूं, बहराइच, पीलीभीत, शाहजहांपुर एवं बरेली के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं घरेलू बिजली के 11 केवी फीडरों को अलग किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि फीडर अलग होने के बाद ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को कम से कम 16 घंटे बिजली आसानी से उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे लोड का संतुलन भी बनाए रखने में मदद मिलेगी। फीडर अलग करने का काम भी अगले साल सितंबर से पहले पूरा कराने की योजना बनाई गई है।
पावर कार्पोरेशन के प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं चेयरमैन संजय अग्रवाल का कहना है कि केंद्र ने दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 6943 करोड़ तथा आईपीडीएस के तहत 4900 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दे दी है।
नवंबर तक स्वीकृति धन जारी होने की उम्मीद है। प्रस्तावित कार्यों के टेंडर आदि की औपचारिकता अभी से पूरी कर ली जा रही है ताकि केंद्र से पैसा मिलते ही दिसंबर में काम शुरू कराया जा सके। अगले साल सितंबर तक नेटवर्क आदि का काम पूरा क राने की योजना है।