कौन-कौन खाता है तंबाकू.. कौन करता है धूम्रपान। योग, व्यायाम और खेल से किन-किन का नियमित नाता है? बच्चे कौन सा खेल खेलते हैं और कौन सा वाद्ययंत्र बजाते हैं?
सोते समय मच्छरदानी लगाते हैं या नहीं? गरीब कितने हैं और कितने कर जाते हैं पलायन? साफ-सफाई के लिए साबुन का इस्तेमाल करते हैं या नहीं? करते हैं तो कब-कब?
ये सवाल हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कल्पना वाले सांसद आदर्श ग्राम योजना के बाशिंदों के बारे में। सरकार ने इसके अलावा योजना में चयनित हर गांव से जुड़ी ऐसी-ऐसी और जानकारियां भी मांगी हैं जिससे उसे गांव के हर सदस्य की माली हालत, पढ़ाई-लिखाई, खान-पान, रहन-सहन-हॉवी का पता चल सके।
गांव में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल के साथ केंद्र या राज्य सरकार से दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं व उसके लाभार्थियों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। पूछा गया है कि गांव में नौकरीपेशा कितने हैं और सरकारी, निजी या प्राइवेट में कहां काम कर रहे?
ये सवाल भी होंगे
वहीं, यह भी पूछा जाएगा कि राशन कार्ड है तो कौन सा और राशन पा रहे या नहीं। अपना घर है तो कूड़ा डालने का स्थान, शौचालय है तो किस तरह का? खेती करते हैं तो कीटनाशक का प्रयोग कर रहे या नहीं।
बैंक, डाकघर, एटीएम, बस स्टाप, रेलवे स्टेशन, पुस्तकालय, सार्वजनिक सेवा केंद्र या पशु चिकित्सा केंद्र हैं या नहीं? इनकी नजदीकी दूरी कितनी? सवालों में यह चिंता भी झलकी है कि मोदी ने जिस योग को पूरी दुनिया में मान्यता दिलाई, इन गांवों में उसका क्या हाल है? पूछा गया है कि इन गांवों में सदस्य नियमित रूप से योग-व्यायाम करते हैं या नहीं?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसके लिए एक प्रश्नावली भेजी है। इसमें परिवार, ग्राम व ग्राम पंचायत स्तर की तीन तरह की प्रश्नावलियां हैं। इसे गांव का बेसलाइन सर्वे नाम दिया गया है।
घर-घर जाकर अलग-अलग प्रारूप पर इन सूचनाओं को जुटाकर केंद्र सरकार की वेबसाइट पर दर्ज किया जाएगा। प्रमुख सचिव समग्र ग्राम विकास रजनीश दुबे ने बताया कि हर जिले में नामित चार्ज अधिकारी अनुभवी लोगों से सर्वे कराएंगे। इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं।