फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केंद्र ने लखनऊ मेट्रो को दी मंजूरी, मिलेंगे 1350 करोड़ रुपये

Wed, 23 Dec 2015 05:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
मेट्रो रेल परियोजना को हरी झंडी के बाद साथ ही केंद्र सरकार अब इसकी गारंटर बन गई है। केंद्र और राज्य दोनों ही एलएमआरसी में अब 50-50 फीसदी के भागीदार होंगे। इस मंजूरी के बाद केंद्र नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए 1350 करोड़ रुपये की मदद देगा।
विज्ञापन


इसके साथ ही सेना, रेलवे और बीएसएनएनएल जैसे केंद्रीय उपक्रमों से एलएमआरसी को मदद और अधिक बढ़ जाएगी। एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने इस अनुमोदन को बहुत बड़ी कामयाबी बताया। उन्होंने कहा कि दो साल के संघर्ष के बाद परियोजना को केंद्र की मंजूरी मिली है। अब केंद्र के भी निदेशक एलएमआरसी जॉइन करेंगे।

6900 करोड़ में से 1350 करोड़ देगा केंद्र
ट्रांसपोर्ट नगर से मुंशीपुलिया तक करीब 22 किलोमीटर के इस रूट पर कुल खर्च करीब 6900 करोड़ रुपये का होगा। डीएमआरसी की ही तरह जो वित्तीय व्यवस्था लखनऊ मेट्रो के लिए है, उसमें कुल बजट 6900 करोड़ का 20 फीसदी राज्य सरकार, 20 फीसदी केंद्र सरकार और बकाया 60 फीसदी विदेशी ऋण के जरिये जुटाया जाएगा।
विज्ञापन


जिसमें राज्य और केंद्र सरकार करीब 1350-1350 करोड़ खर्च करेंगे। बकाया करीब 4100 करोड़ रुपये विदेशी कर्ज से जुटाये जायेंगे। राज्य सरकार अपने हिस्से के लगभग 1000 करोड़ रुपये देने का एलान कर चुकी है जबकि, केंद्र सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ और चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 173 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

4100 करोड़ के विदेशी कर्ज मिलेगा

विदेशी ऋण के लिए एलएमआरसी की यूरोपियन इंवेस्टमेंट बैंक, एशियन डवलपमेंट बैंक, जापानी बैंक जाइका और फ्रांसीसी बैंक ईएफडी से बातचीत की हुई थी।

यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक इस वर्ष बतौर पहली किस्त 167 करोड़ 17 लाख रुपये (23 मिलियन यूरो) का कर्ज देगा। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड से मेंट्रो को अगस्त में ही हरी झंडी मिल गई थी। इसके बाद यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक 167 करोड़ 17 लाख रुपये (23 मिलियन यूरो) देने की हामी भरी है। अब यूरोपीय यूनियन बैंक से 4100 करोड़ रुपये का विदेशी कर्ज आसानी से मिल जाएगा।

एलएमआरसी के प्रक्रियरत और स्वीकृत टेंडर
रोलिंग स्टॉक--1100 करोड़
सिविल निर्माण--631 करोड़
डिपो--250 करोड़
फीडर सर्विसेज--100 करोड़
एक्यलरेटर--100 करोड़
टेलीफोन सिस्टम--150 करोड़
स्पेशल स्पैन--200 करोड़

एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव का कहना है कि दिसंबर-2013 में हमको केंद्र से सैद्धांतिक सहमति मिली थी। जिसके बाद लगातार दो साल से इस मंजूरी के लिए संघर्ष जारी था। अगस्त में पीआईबी क्लीयरेंस हुई, अब एप्रूवल भी हो गया। अब कंपनी में केंद्र से भी कुछ निदेशक जॉइन करेंगे। हमको केंद्रीय अंशदान और विदेशी ऋण भी आसानी से मिल सकेगा। ये बहुत बड़ी खुशखबरी है।

एयरपोर्ट टर्मिनल से 100 मीटर दूर बनेगा मेट्रो स्टेशन

ट्रांसपोर्ट नगर से चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट के बीच मेट्रो का निर्माण कार्य शुरू होने में आ रहीं अड़चनें अब दूर हो गई हैं। अब मेट्रो स्टेशन यहां एयरपोर्ट टर्मिनल से 50 मीटर की जगह 100 मीटर दूर बनेगा। लोग सब-वे से टर्मिनल तक पहुंचेंगे।

पहले एलएमआरसी 50 मीटर दूर ही स्टेशन बनाना चाहता था। जबकि एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना था कि उनके मानकों के हिसाब से मुख्य परिसर से 100 मीटर दूरी पर मेट्रो स्टेशन बनाया जाना बेहतर है।

एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव और निदेशक दलजीत सिंह ने बताया कि एयरपोर्ट लाइन को लेकर दिल्ली में एयरपोर्ट अथॉरिटी के सामने लेआउट रखा गया था। चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट को लखनऊ मेट्रो से जोड़ने के लिए अब नई योजना पर काम किया जा रहा है।

टर्मिनल 1 व 2 के बीच बनेगा अंडरग्राउंड स्टेशन
एलएमआरसी ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 और 2 के बीच मेट्रो का अंडरग्राउंड स्टेशन बनाया जाएगा। एयरपोर्ट से ही लोगों को मेट्रो स्टेशन में प्रवेश मिलेगा। जहां से वे सीधे ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन पहुंच जाएंगे। एयरपोर्ट के बाद पहला स्टेशन अमौसी होगा और दूसरा ट्रांसपोर्ट नगर।

प्राइमरी सेक्शन पूरा होने तक करना होगा इंतजार
एयरपोर्ट को मेट्रो रेल से कनेक्टिविटी के लिए ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के प्राइमरी सेक्शन के पूरा होने का इंतजार करना होगा। इस सेक्शन में ट्रांसपोर्ट नगर से एलिवेटेड ट्रैक चलेगा, जो पहले अमौसी स्टेशन तक ले जाएगा। इसके बाद  मेट्रो अंडरग्राउंड हो जाएगी और सीधे टर्मिनल-1 और 2 के बीच पार्किंग एरिया में मेट्रो स्टेशन पहुंचा देगी।
विज्ञापन

नए सिरे से बनेगी चारबाग से बसंतकुंज मेट्रो की डीपीआर

मेट्रो के चारबाग से बसंतकुंज रूट वाले ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की डीपीआर नए सिरे से बनाई जाएगी। दरअसल ढाई साल पहले डीपीआर बनने के बाद इस रूट पर कई इमारतों का निर्माण किया जा चुका है। इसे देखते हुए एक एजेंसी को टोपोग्राफिकल सर्वे का काम दिया गया है। एजेंसी अगले सप्ताह सर्वे शुरू कर देगी, जो 15 दिन में पूरा हो जाएगा।

इस सर्वे के जरिए दो साल में मेट्रो रूट पर जो बदलाव आए हैं, उनका परीक्षण किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि स्टेशनों की लोकेशन कहां होगी और कितनी भूमि लेनी पड़ेगी। उसमें से कितनी सरकारी होगी और कितनी निजी भूमि होगी।

कुमार केशव ने बताया कि ये काम भी बहुत तेजी से किया जा रहा है। इसमें अब रिवाइज डीपीआर की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एलएमआरसी एक ही टेंडर पर ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर का काम करवाएगा। ये करीब 11 किलोमीटर का रूट होगा। इसमें निर्माण की शुरुआत बसंतकुंज से होगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें