याची के वकील का कहना था कि वक्फ कानून में राज्य सरकार ने धारा 13(2) में दी गई उक्त शर्त का जब पालन नहीं किया तो उसने उक्त प्रत्यावेदन दिया जो अभी तक विचार किए जाने के लिए लंबित है।
सुनवाई के समय पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता क्यूएच रिजवी पेश हुए जबकि केंद्र व राज्य सरकार के वकील भी मौजूद रहे। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किये बगैर याची के प्रत्यावेदन पर गौर कर निपटारा करने के निर्देश केंद्र व राज्य सरकार को दिए हैं।
अदालत ने कहा कि दोनों सरकारें वक्फ अधिनियम 1995 के प्रावधानों का पालन करके अर्जी पर कानून के मुताबिक गौर कर निर्णीत करें। इस निर्देश के साथ कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया।