जर्मनी के यातायात व ध्वनि प्रदूषण डिवीजन के पूर्व प्रमुख एक्सेल फ्रीडरिक ने कहा कि रोड नेटवर्क के प्रबंधन के लिए कुछ प्रमुख फैसले लेने होंगे। जैसे, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग के लिए अनिवार्य शुल्क सभी नागरिकों पर लगे। आर्थिक नुकसान के चलते सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने लगेंगे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी इससे सुधरेगा। जर्मनी में हमारा मिनिस्टर तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग करता है। इससे पूरी सुविधाएं वैसे ही ठीक हो जाती हैं। मेट्रो के लिए फीडर सिस्टम लाने होंगे।
एक चौथाई लागत में बन जाएगी मेट्रो नियो
परंपरागत मेट्रो नेटवर्क की तुलना में एक चौथाई कीमत में मेट्रो नियो बनाई जा सकती है। 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए यह बहुत उपयोगी हो सकता है। नासिक में पहला प्र्रोजेक्ट मेट्रो नियो का कर रहे महा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एमडी बृजेश दीक्षित ने बताया कि एलीवेटेड ट्रैक पर यह ट्रेन भी चलेगी। दो कोच की इस ट्रेन के लिए छोटे स्टेशन बनेंगे।
पटरी नहीं होने की वजह से सिग्नल सिस्टम और पटरी की लागत भी कम होती है। कोच भी हल्के होते हैं। सबसे बड़ी कोच की खासियत यह है कि एलीवेटेड ट्रैक से हटाकर इसे सड़क पर फीडर सर्विस की तरह भी उपयोग किया जा सकता है। गोरखपुर, वाराणसी जैसे शहरों में यह उपयोगी हो सकता है।
अभी तक स्टील के बने कोच मेट्रो प्रोजेक्टों में उपयोग हो रहे थे। टीटागढ़ कंपनी ने एल्युमिनियम के कोच बनाकर मेट्रो को देने की शुरूआत की है। कंपनी ने अरबन मोबिलिटी एक्सपो में इसे प्रजेंट किया है। कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि पुणे मेट्रो में सबसे पहले इन कोच का उपयोग होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा हल्के कोच के साथ कम कीमत और शांत ट्रेन बनाने के रूप में सामने आयेगा।
क्यूआर कोड स्कैन कर जानिए अपनी मेट्रो
यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने पूरे प्रदेश में चल रही मेट्रो के बारे में जानने के लिए क्यूआर कोड का उपयोग किया है। हर शहर की मेट्रो के लिए अलग क्यूआर कोड बनाया गया है। मोबाइल से स्कैन करते ही प्रोजेक्ट के बारे में सूचना मिल जाएगी। इन क्यूआर कोड को एक्सपो के बाद सभी मेट्रो स्टेशनों पर भी रखा जाएगा।