ग्राम
पंचायतें अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना से भी गांव के
भीतर की गलियों के निर्माण में स्टोन खड़ंजा, सीमेंट कंक्रीट व इंटरलॉकिंग
ब्लॉक का उपयोग कर सकेंगी।
केंद्र से अनुमति मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने
इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। मनरेगा
के अंतर्गत गांवों की गलियों के निर्माण में अब तक सीमेंट, कंक्रीट व
इंटरलॉकिंग ब्लॉकों के प्रयोग पर सख्त रोक थी।
राज्य सरकारों ने योजना में
मिट्टी के काम होने के बाद गांव की गलियों को पक्का करने के लिए इंटरलॉकिंग
व सीसी रोड बनवाने की अनुमति मांगी थी।
12वें व 13वें वित्त से प्राप्त
रकम से पंचायतें इस तरह का काम पहले से कराती रही हैं। केंद्रीय ग्रामीण
विकास मंत्रालय ने राज्य सरकारों को क्षेत्र की आवश्यकता, स्थानीय स्तर पर
मटेरियल की उपलब्धता व मटेरियल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की शर्त के साथ
सीमेंट कंक्रीट व इंटरलॉकिंग ईंटों के प्रयोग की अनुमति दे दी है।
विशेष
सचिव ग्राम्य विकास अशोक कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।
पंचायतों से कहा गया है कि वे इस तरह के कार्य कराने के बावजूद लेबर व
मटेरियल का 60:40 का अनुपात बरकरार रखेंगी।
काम के अवसर होंगे कमग्राम
प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया कि इस शासनादेश में
पेंच है। इससे गांव की गलियां तो बाद में ठीक होंगी, श्रमिकों के काम के
अवसर पहले कम हो जाएंगे।
सीसी रोड व इंटरलॉकिंग कार्यों में मिट्टी व
खंड़जा के काम से अधिक पैसा खर्च होगा। इससे लेबर व मटेरियल का 60:40 का
अनुपात मेंटेन कर पाना मुश्किल होगा।
दूसरा, इस व्यवस्था से मशीनों का
उपयोग बढ़ेगा, जो पंचायतों में ठेकेदारी व्यवस्था की ओर ले जाएगा। ऐसे में
इस अनुपात में भी बदलाव होना चाहिए।