गठिया के मरीजों के लिए जॉइंट फ्रेश दवा
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दूसरे शब्दों में इसका मतलब है कि भोजन जो आपकी दवा भी हो। न्यूट्रास्यूटिकल का इस्तेमाल सामान्य रूप से स्वस्थ रहने के लिए विशिष्ट उपचार पद्धति के रूप में किया जाता है। इससे बीमारी की प्रक्रिया रोकने और उसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
मंगलवार को सीडीआरआई के निदेशक प्रो. आलोक धवन ने इसे विकसित करने वाली वैज्ञानिकों की टीम और बाजार में ला रही फार्मा कंपनी के कार्यकारी निदेशक डॉ. संजीव अग्रवाल की मौजूदगी में लांच किया। प्रो. धवन का कहना है कि ओस्टियोआर्थराइटिस में राहत देने को पालक से बना यह न्युट्रास्युटिकल बड़ी राहत देगा।
यह आम तेलों की तरह केवल फौरी राहत ही नहीं देता। पालक में मौजूद स्पीनेशिया ऑलरेसी का नैनो फॉर्मूलेशन हड्डियों के कार्टिलेज के क्षरण को रोककर उसकी मरम्मत शुरू करता है। इस पेय पदार्थ में विषाक्तता भी नहीं है। नैनो फोर्मूलेशन से यह कम मात्रा में भी प्रभावी है।
ज्वाइंट फ्रेश के एक पैकेट की कीमत करीब 106 रुपये है, जो एक दिन की खुराक होगी। कंपनी कम आय वर्ग के मरीजों को राहत देने के लिए दवा को टेबलेट के रूप में ला रही है। दो महीने में इसे भी लांच कर दिया जाएगा। इससे कीमत प्रति डोज 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। दवा के पूरी तरह हर्बल होने सेे इसके साइड इफेक्ट भी नहीं माने जा रहे हैं।
नैनो फॉर्मूला से बनाई दवा का असर इससे समझा जा सकता है कि एक पैकेट में करीब एक किलो पालक के तत्व शामिल हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक किलो पालक से करीब एक ग्राम नैनो फॉर्मूलेशन तैयार होता है। यानी, एक डोज में करीब एक किलो पालक मरीज लेगा। इस मात्रा को केवल 100 मिली पानी में घोलकर पिया जा सकता है।
इस टीम ने बनाई दवा
वैज्ञानिक डॉ. रितु त्रिवेदी, डॉ. प्रभात रंजन मिश्रा, डॉ. राकेश मौर्य, डॉ. एसके रथ, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. पीके शुक्ला।