लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पिछले पांच वर्षों में सीबीएसई और सीआईएससीई के स्कूलों में कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया, इसकी समीक्षा की जाएगी। शहर में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 200 से ज्यादा और सीआईएससीइ के करीब 60 स्कूल संचालित हैं। इन विद्यालयों को एनओसी तो बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग देता है, लेकिन इनके प्रबंधक राज्य सरकार का आदेश-निर्देश जल्दी नहीं मानते हैं। आरटीई के तहत दाखिला प्रक्रिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस बार तो सीबीएसई व सीआईएससीई से जुड़े स्कूलों ने जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के दबाव में दो-चार बच्चों को किसी तरह प्रवेश दे दिया है, लेकिन इनमें कई विद्यालय ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में एक भी बच्चे को दाखिला नहीं दिया है। अब इन विद्यालयों की समीक्षा बेसिक शिक्षा विभाग करेगा। समीक्षा में जो विद्यालय प्रवेश न लेने वाले मिलेंगे, उनसे जवाब तलब करने के बाद एनओसी रद्द करने की सिफारिश संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक को भेजी जाएगी।
कितने सेक्शन में चल रही क्लास, होगी जांच
निजी स्कूलों में प्री नर्सरी और कक्षा एक की कक्षाएं कितने सेक्शन में चल रही हैं, इसकी जांच की जाएगी। दरअसल, प्री नर्सरी व कक्षा एक में हर सेक्शन के हिसाब से बच्चों की संख्या के अनुसार आरटीई की सीटें निर्धारित की जाती हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने मुद्दे को उठाया है।
छूटे सभी विद्यालयों को जोड़ा
आरटीई के तहत छूटे हुए लगभग सभी विद्यालयों को जोड़ने में सफलता मिली है। अब निजी स्कूल क्लास के सेक्शन न छिपा सकें, इसके लिए जांच होगी और पांच साल में कितने बच्चों का प्रवेश लिया इसकी समीक्षा की जाएगी। -राम प्रवेश, बीएसए