अदालत के आदेश पर सीबीआई ने लखनऊ कारागार में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की मौत के मामले की फिर से जांच शुरू कर दी है।
इसके तहत सीबीआई पूर्व में हुई जांच की रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है।
जिसके बाद कारागार व पुलिस विभाग के उन कर्मचारियों व अधिकारियों से नए सिरे से पूछताछ की जाएगी, जो जांच से जुड़े थे अथवा जिनकी घटनास्थल पर मौजूदगी थी।
मामले की जांच कर रहे सीबीआई के अफसरों का कहना है कि सबसे दोबारा पूछताछ नहीं की जाएगी, बल्कि उनसे की जाएगी, जिनकी भूमिका अधिक महत्वपूर्ण रही।
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डॉ. सचान का शव मिलने के बाद मौके पर पड़ताल करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ ही उन चिकित्सकों से भी पूछताछ की जानी है, जिन्होंने शव का पोस्टमार्टम किया था।
सीबीआई के सूत्र बताते हैं कि हालांकि पूर्व में हुई जांच के तहत मृत्यु के कारणों की जानकारी के लिए विधि विज्ञान विशेषज्ञों से परामर्श कर उनकी राय ली जा चुकी है, लेकिन यह कवायद नए सिरे से की जा सकती है।
सीबीआई ने मामले की दोबारा जांच शुरू करने के बारे में पिछले दिनों अदालत में रिपोर्ट दाखिल की है।
सीबीआई को यह कार्रवाई इसलिए करनी पड़ी क्योंकि डॉ. वाईएस सचान की पत्नी डॉ. मालती सचान ने अदालत से कहा था कि सीबीआई ने जो दोबारा जांच शुरू की है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।
डॉ. मालती सचान की इस दरख्वास्त पर अदालत ने सीबीआई से जांच के संदर्भ में जवाब मांगा था।
उल्लेखनीय है कि अदालत ने सीबीआई को न सिर्फ डिप्टी सीएमओ की मौत की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हुए हैं बल्कि एनआरएचएम घोटाले के तहत हुई परिवार कल्याण विभाग के सीएमओ डॉ. विनोद आर्य व डॉ. बीपी सिंह की सनसनीखेज हत्या के मामलों की भी फिर से जांच करने को कहा है।
असल में सीबीआई ने डॉ. विनोद आर्य की हत्या के मामले में पूर्व में की गई जांच में पहले तत्कालीन सीएमओ डॉ. एके शुक्ला को दोषी माना था।
लेकिन बाद में साक्ष्य न मिलने की बात कहते हुए मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। अदालत ने इस पर सीबीआई को फटकार लगाते हुए प्रकरण की दुबारा जांच करने को कहा था।