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1179 करोड़ के चीनी मिल बिक्री घोटाले में सीबीआई ने दर्ज किया केस, सात नामजद

Sat, 27 Apr 2019 05:32 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के सात सरकारी चीनी मिलों के विनिवेश में कथित घोटाले के मामले में एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा एजेंसी ने 14 अन्य मिलों के मामले में हुई अनियमितता की जांच के लिए छह प्रिलिमनरी इनक्वायरी (पीई) भी दर्ज की है। 2010-11 में जब विनिवेश की प्रक्रिया हुई थी, तब मायावती मुख्यमंत्री थीं। सीबीआई की एफआईआर में किसी राजनीतिक व्यक्ति या सरकारी अधिकारी का नाम नहीं है। आरोप है कि 21 मिलों के विनिवेश के गड़बड़झाले में सरकारी खजाने को 1179 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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सीबीआई के मुताबिक एजेंसी ने यूपी पुलिस द्वारा गोमती नगर थाने में पहले से दर्ज एफआईआर को ही एफआईआर में तब्दील किया है। यूपी के प्रमुख सचिव (गृह) ने मई 2018 में सीबीआई को इस मामले की जांच का आवेदन दिया था। करीब एक साल की तैयारी के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और कंपनी कानूनों के प्रावधानों में गड़बड़ी कर विनिवेश प्रक्रिया को प्रभावित किया था। जांच में सरकारी अधिकारी और राजनीतिक हस्तक्षेप के संकेत मिले हैं।

लपेटे में आ सकते हैं कुछ मंत्री और अधिकारी
एफआईआर में जिन सात लोगों को आरोपी बनाया गया है उनमें दिल्ली के रोहिणी निवासी राकेश शर्मा और उनकी पत्नी सुमन शर्मा, इंद्रापुरम गाजियाबाद के धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर के गौतम मुकुंद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद नसीम अहमद और मोहम्मद वाजिद शामिल हैं। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि जांच की प्रक्रिया में कुछ मंत्री और अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं।

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कबाड़ के भाव बेचे गए प्लांट व मशीनरी

वर्ष 2012 में यूपी विधानसभा में पेश सीएजी रिपोर्ट के अनुसार पहले तो चीनी मिलों के प्लांट व मशीनरी को कबाड़ बताकर बाजार मूल्य 114.96 करोड़ तय किया गया। बाद में कीमत घटाकर 32.88 करोड़ कर दी गई। सीएजी के  अनुसार सभी मिलें 2009-10 तक संचालित थीं। जरवल रोड, सहारपुर सिसवा बाजार मिल ने 2008-09 में और खड्डा मिल 2009-10 में लाभ भी कमाया था। दस चालू मिलें 61 से 95 फीसदी तक की क्षमता पर चलीं। मिलों की औसत उपभोग क्षमता बिकने के बाद 67 से बढ़कर 81 फीसदी हो गई। ऐसे में प्लांट व मशीनरी को कबाड़ के भाव बेचना गलत था।

बोली लगाने वालों को पहले से थी पूरी जानकारी
सीएजी ने पाया कि मिलों को बेचने की प्रक्रिया में निविदा प्रक्रिया प्रभावित हुई। बुलंदशहर व सहारनपुर मिलों के लिए वेव इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और पीबीएस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ही एकमात्र बोली लगाने वाले थे। इनसे 51 प्रतिशत के  बराबर बिड्स प्राप्त हुईं। इसके विपरीत केंद्र सरकार क ी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की ओर से छह चीनी मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से ऊपर की बिड जमा की गई। इस तरह अपेक्षित मूल्य की पूर्व सूचना एवं एससीएम लागू करने की प्रक्रिया में बदलाव के  कारण 21 मिलों में 14 मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से बहुत कम मूल्य मिला।
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