वर्ष 2012 में यूपी विधानसभा में पेश सीएजी रिपोर्ट के अनुसार पहले तो चीनी मिलों के प्लांट व मशीनरी को कबाड़ बताकर बाजार मूल्य 114.96 करोड़ तय किया गया। बाद में कीमत घटाकर 32.88 करोड़ कर दी गई। सीएजी के अनुसार सभी मिलें 2009-10 तक संचालित थीं। जरवल रोड, सहारपुर सिसवा बाजार मिल ने 2008-09 में और खड्डा मिल 2009-10 में लाभ भी कमाया था। दस चालू मिलें 61 से 95 फीसदी तक की क्षमता पर चलीं। मिलों की औसत उपभोग क्षमता बिकने के बाद 67 से बढ़कर 81 फीसदी हो गई। ऐसे में प्लांट व मशीनरी को कबाड़ के भाव बेचना गलत था।
बोली लगाने वालों को पहले से थी पूरी जानकारी
सीएजी ने पाया कि मिलों को बेचने की प्रक्रिया में निविदा प्रक्रिया प्रभावित हुई। बुलंदशहर व सहारनपुर मिलों के लिए वेव इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और पीबीएस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ही एकमात्र बोली लगाने वाले थे। इनसे 51 प्रतिशत के बराबर बिड्स प्राप्त हुईं। इसके विपरीत केंद्र सरकार क ी इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) की ओर से छह चीनी मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से ऊपर की बिड जमा की गई। इस तरह अपेक्षित मूल्य की पूर्व सूचना एवं एससीएम लागू करने की प्रक्रिया में बदलाव के कारण 21 मिलों में 14 मिलों के लिए अपेक्षित मूल्य से बहुत कम मूल्य मिला।