सीबीआई ने शनिवार को लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय में तैनात वरिष्ठ अधीक्षक विकास मिश्र के लखनऊ व वाराणसी के ठिकानों पर छापामारी की। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने मामला दर्ज कर यह कार्रवाई की। जांच एजेंसी के हाथ 12 लाख रुपये नकद, 26 लाख रुपये की एफडी, पांच लाख रुपये के जेवरों की रसीद, 45 बैंक खाते व दो बैंक लॉकरों के दस्तावेज लगे।
छापा मिश्र के लखनऊ के गोमतीनगर में वैभवखंड, विवेकखंड व विजयखंड स्थित तीन व वाराणसी के एक आवास पर पड़ा। सीबीआई ने कुछ दस्तावेज, कंप्यूटर व अन्य सामान भी अपने कब्जे में लिया है। मिश्र का स्थानांतरण वाराणसी से लखनऊ हुआ था और उन्होंने पिछले सोमवार को ही यहां पदभार ग्रहण किया। पूर्व में भी वह लखनऊ में तैनात रह चुके हैं।
सीबीआई अब दस्तावेज के आधार पर बैंक लॉकरों को खोलने की कार्यवाही करेगी। सीबीआई ने जिन मकानों पर छापा मारा उनके स्वामित्व के दस्तावेज भी जांचे जा रहे हैं। हालांकि ये सभी विकास मिश्र के ही बताए जा रहा हैं। सीबीआई की कार्रवाई से पासपोर्ट विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
धर्मांतरण के लिए उकसाने का लगा था आरोप
विकास मिश्र पर जून, 2018 में नोएडा में रह रहे विदेशी कंपनी के अधिकारी अनस की पत्नी तन्वी सेठ ने धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से शिकायत की थी। अनस मूलरूप से कैसरबाग के रहने वाले हैं। वह अपनी पत्नी के साथ पासपोर्ट बनवाने के लिए गोमतीनगर स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट सेवा केंद्र गए थे।
वहां वरिष्ठ अधीक्षक के पद पर तैनात विकास मिश्र ने उनके निकाहनामे व अन्य दस्तावेजों पर सवाल उठाए। इससे नाराज तन्वी ने उन पर धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए विदेश मंत्री से शिकायत की थी। इस पर सुषमा स्वराज ने तत्काल मिश्र का तबादला गोरखपुर करने का आदेश जारी कर दिया था। गोरखपुर से उन्हें वाराणसी स्थानांतरित किया गया था।