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आसाराम केस: गवाह राहुल के गायब होने की जांच करेगी सीबीआई

Wed, 31 Aug 2016 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आसाराम
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नाबालिग बालिका से दुराचार में जेल में बंद आसाराम के मुकदमे के प्रमुख गवाह डॉ. राहुल कुमार सचान के गायब होने की जांच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सोमवार को सीबीआई को सौंप दी।
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इसके लिए दायर याचिका पर अपने निर्णय में जस्टिस अमेरश्वर प्रताप साही और जस्टिस डॉ. विजय लक्ष्मी ने कहा कि बेहद हाई प्रोफाइल और संवेदनशील मामले में यूपी पुलिस ने अब तक की जांच बहुत ही लापरवाही से की है।

प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह एसआईटी से जांच करवाने जा रही है, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे भी नहीं माना।

अदालत ने उम्मीद जताई है कि सीबीआई छह महीने से कम समय में जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंप देगी। अदालत ने याचिकाकर्ता ओवरसीज इंडियन सिटीजन बेनेट कास्टिलीनो को छूट दी है कि वह अगर चाहे तो और निर्देश जारी करवाने के लिए कोर्ट का रुख कर सकता है।
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कैसे गायब हुआ राहुल सचान

राहुल सचान - फोटो : amar ujala
डॉ. राहुल सचान 2009 से 2013 तक आसाराम का निजी सचिव था। उसके पास आसाराम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं। डॉ. सचान के आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे सुरक्षा दिलाने के निर्देश दिए थे। उसकी सुरक्षा का जिम्मा गनर कांस्टेबल विजय बहादुर के पास था।

21 नवंबर 2015 को विजय बहादुर सात दिन की छुट्टी पर गया तो सुरक्षा के लिए गनर कांस्टेबल अमित कुमार सिंह को लगाया गया। अमित ने बताया कि 25 नवंबर 2015 को वह राहुल को कैंपबेल रोड बालागंज में मरी माता मंदिर स्थित उसके घर से मोटरसाइकिल पर कैसरबाग बस अड्डे ले गया।

राहुल ने उसे बताया था कि वह कहीं जा रहा है। अगले दिन लौट आएगा और फोन करेगा, लेकिन अगले दिन फोन नहीं आया। अमित सिंह ने उसे कॉल की तो फोन बंद मिला। उसने इसकी जानकारी लखनऊ पुलिस लाइन में शैडो गनर प्रभारी अफजल हसन मेहंदी को दी।

छुट्टी के बाद विजय बहादुर लौटा तो अफजल ने उसे डॉ. राहुल के गायब होने की सूचना दी। विजय ने राहुल को खोजा, लेकिन वह नहीं मिला। उसके घर पर नजर रखी जाने लगी। एक महीने बाद राहुल के अपहरण की एफआईआर लखनऊ के ठाकुरगंज पुलिस थाने में दर्ज की गई।

अदालत ने सरकार के दावे किए खारिज

हाईकोर्ट में एसएपी लखनऊ का पत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें बताया कि 18 अगस्त 2016 को कांस्टेबल विजय बहादुर और कांस्टेबल अमित कुमार को कर्तव्यपालन में कमी और लापरवाही के लिए ‘सेंसर एंट्री’ (हल्की प्रतिकूल प्रविष्टि) दी गई है।

वहीं एसएसपी द्वारा एएसपी (सिटी पश्चिम) लखनऊ को प्राथमिक जांच सौंपने का 21 अगस्त को जारी पत्र भी प्रस्तुत किया गया। इस पत्र में माना गया कि जांच गहराई से नहीं की गई, न ही इसमें रुचि दिखाई गई। इसके लिए जांच में शामिल एसएचओ की लापरवाही मानी गई।

एक और पत्र दिया गया जिसमें एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत सिंह चौधरी ने एसटीएफ के आईजी व एसएसपी एसटीएफ लखनऊ को जांच अपने हाथ में लेकर विशेष टीम बनाने को कहा था।

हाईकोर्ट ने कहा कि ये सभी पत्र तब जारी किए गए जब याचिका दायर हो गई और इस पर कोर्ट के आदेश जारी कर दिए। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच कोई विश्वास नहीं जगा पाई है। ऐसी कोई उम्मीद भी नहीं है कि इस जांच से कोई खुलासा हो सकेगा। इससे यही लगता है कि पुलिस जांच में विफल में रही है।

डॉ. राहुल का क्या हुआ?
हाईकोर्ट ने कहा कि अब तक की जांच में डॉ. राहुल के गायब होने के हालात भी सामने नहीं आ सके हैं। फिर भी उसने दो संभावनाएं जताई हैं। पहली, राहुल किसी अपराध का शिकार हो गया है। दूसरी, वह अपनी मर्जी से भूमिगत हो गया है, लेकिन इस दिशा में भी अब तक जांच नहीं हुई है।

हाईकोर्ट ने गिनाईं पुलिस की खामियां

कॉल डिटेल्स पर काम नहीं किया
दिसंबर 2015 में ही डॉ. राहुल के फोन की कॉल डिटेल्स निकाली गई जिसमें उसकी आखिरी लोकेशन 25 नवंबर को हरदोई के निकट मिली थी, लेकिन केस डायरी में ऐसा कुछ दर्ज नहीं है कि इस दिशा में आगे जांच की गई हो। बल्कि नई दिल्ली में राहुल की महिला मित्र और कानपुर में उसके पिता के घर पहुंचकर उसकी तलाश की गई।

सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ नहीं
राहुल के गनर्स और गनर प्रभारी से भी कोई पूछताछ नहीं हुई। उनसे यह तक नहीं पूछा गया कि राहुल के बारे में उन्हें कोई जानकारी क्यों नहीं है?

केस डायरी महज औपचारिकता
जांच की केस डायरी को ठीक से मेंटेन नहीं किया गया। अप्रैल 2016 में जिस जांच अधिकारी ने जांच शुरू की, उसने भी कोई ऐसी प्रगति नहीं की, जिससे विश्वास पैदा हो कि जांच सही दिशा में हुई है। केस डायरी एक औपचारिकता भर लगती है।

छह महीने तक जांच नहीं
जनवरी 2016 में जांच अधिकारी दिल्ली में राहुल की दोस्त के घर गए थे, उसके बाद 3 जून 2016 को हरदोई की दिशा में जांच की गई। बीच के छह महीने तक जांच की कोई गतिविधि रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है जो बताए कि पुलिस जांच में गंभीर थी।
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गवाहों की हत्याओं और हमलों का सिलसिला

10 जून 2014 : मामले के गवाह और आसाराम के पूर्व आयुर्वेद चिकित्सक अमृत प्रजापति को 17 दिन पहले गुजरात के राजकोट में उसके क्लीनिक पर गोलियां मारी गईं, उसकी मौत हो गई।

11 जनवरी 2015 : दुराचार के गवाह और आसाराम के बावर्ची अखिल गुप्ता की उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में उसके घर के पास अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी।

13 फरवरी 2015 : राहुल सचान गवाही के लिए जोधपुर जिला जेल पहुंचे थे, जहां उन्हें चाकुओं से गोद दिया गया, डॉक्टरों ने मुश्किल से उनकी जान बचाई।

13 मई 2015 : आसाराम और उसके बेटे पर दर्ज तीन मामलों में गवाह और 2001 से 2005 तक उसके सचिव रहे महेंद्र चावला पर हरियाणा के पानीपत में सनौली गांव में गोलियां चलाई गईं, वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

25 जुलाई 2015 : प्रमुख गवाह कृपाल सिंह की हत्या कर दी गई।

23 दिसंबर 2015 : गवाह राहुल सचान के अपहरण की एफआईआर लखनऊ में दर्ज की गई।
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