उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के कर्मचारियों के भविष्य निधि का पैसा निजी कंपनी डीएचएफएल में निवेश के मामले की जांच कर रही सीबीआई की जांच अटक गई है। सीबीआई ने इस मामले में यूपीपीसीएल के तीन अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति उत्तर प्रदेश शासन से मांगी थी, लेकिन शासन ने अब तक अनुमति नहीं दी है।
जानकारी के अनुसार सीबीआई ने 2631 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में यूपीपीसीएल के चेयरमैन रहे संजय अग्रवाल और आलोक कुमार और एमडी रहीं अपर्णा से पूछताछ के लिए सीबीआई ने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुमति मांगी थी। संजय अग्रवाल और आलोक कुमार दोनों ही अधिकारी इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। जबकि अपर्णा यू स्वास्थ, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में उक्त अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति न मिलने से सीबीआई की जांच रुक गई है। वहीं सूत्र यह भी बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग ने उक्त अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति सीबीआई को देने से इंकार कर दिया है। हालांकि इस संबंध में कोई भी अधिकारी आधिकारिक रूप से बोलने से बच रहा है। वहीं सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि उसे सरकार का जवाब अब तक नहीं मिला है।
बता दें कि यह पूरा मामला नवंबर 2019 में प्रकाश में आया था जिसके बाद हजरतगंज थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और जांच ईओडब्ल्यू को स्थानांतरित कर दी गई थी। पड़ताल के दौरान पता चला था कि यह पूरा मामला 2017 से लेकर 2018 के बीच का है। इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्रा, वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी और ट्रस्ट के सचिव प्रवीण गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। इन लोगों पर भविष्य निधि के पैसों को ऐसी कंपनी में निवेश कर दिया जो अधिकृत ही नहीं थी। इसके पीछे मोटे कमीशन का खेल खेला गया। बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।