मनरेगा घोटाले की जांच के तहत सीबीआई ने बलरामपुर, गोंडा, सोनभद्र, महोबा और कुशीनगर जिले में मनरेगा के तहत आवंटित राशि व उसके विभिन्न मदों में हुए खर्च का ब्लॉकवार परीक्षण करना शुरू कर दिया है।
इसके लिए सीबीआई ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से दस्तावेज तलब कर लिए हैं। कुछ दस्तावेज सीबीआई पहले ही हासिल कर चुकी थी।
हालांकि, इस घोटाले की पूर्व में हुई जांच में सामने आ चुका है किस तरह घोटाला हुआ और उस समय किस जिले में कौन अधिकारी तैनात था, इसके बावजूद सीबीआई ने नए सिरे से पूरी कवायद शुरू की है।
इसके लिए सीबीआई की एंटी करप्शन विंग इन पांच जिलों में मनरेगा घोटाले की अवधि में जारी बजट, वहां तैनात रहे अधिकारियों और कराए गए काम का ब्यौरा जुटा रही है।
इस ब्यौरे के हासिल होने के बाद हर जिले के सभी ब्लॉकों में मनरेगा के तहत हुए कार्य और उस पर खर्च हुई रकम का मिलान किया जाएगा।
सीबीआई अफसरों का कहना है कि मनरेगा योजना की जांच का दायरा खासा बड़ा है और इसमें ग्रामीण इलाकों में जाकर कराए गए कार्य का भौतिक सत्यापन करना होगा। इस कवायद में काफी समय लगेगा।
चूंकि इस योजना का क्रियान्वयन ग्राम विकास विभाग, जिलों के विकास कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय की सीधी जिम्मेदारी थी।
लिहाजा जिलों के डीएम, एसडीएम, सीडीओ, बीडीओ जैसे कई अधिकारियों की भूमिका सामने आ सकती है। इसके साथ ही ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों की भी सीधी जिम्मेदारी तय होगी।
सीबीआई मुकदमा दर्ज करने के साथ ही ग्राम विकास विभाग से जिलों को जारी रकम और खर्च का ब्यौरा मांग चुकी है।
इसके साथ ही उसने आर्थिक अपराध शाखा द्वारा की गई मामले की जांच से संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं। सूत्र बताते हैं कि जब हाईकोर्ट ने सीबीआई को मनरेगा घोटाले की जांच के लिए आदेश दिए थे।
सीबीआई के अफसरों उच्च पदस्थ अधिकारियों से आग्रह किया था कि घोटाले से संबंधित दस्तावेजों को किसी सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया जाए। जिलाधिकारियों के कार्यालय में जांच से संबंधित दस्तावेज एकत्र कराए गए हैं।