लखनऊ। रेलकर्मियों व पेंशनधारकों को निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार अब आसानी से मिल सकेगा। उन्हें रेफर होने के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई रेफरल व्यवस्था लागू कर दी गई है। इससे कर्मचारियों को बगैर कागजी कार्रवाई के उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने इसे लागू किया है। सीनियर डीसीएम कुलदीप तिवारी ने बताया कि रेलकर्मियों व पेंशनर्स के लिए अब ऑनलाइन व पेपरलेस ई-रेफरल प्रणाली लागू की गई है। यह पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है। पेंशनधारकों व कर्मचारियों को यूएमआईडी कार्ड और पंजीकृत मोबाइल नंबर से बिना किसी कागजी कार्रवाई के इलाज मिल सकेगा।
इस बाबत बुधवार को हजरतगंज स्थित डीआरएम कार्यालय के सभागार में बैठक की गई, जिसकी अध्यक्षता डीआरएम सुनील कुमार वर्मा ने की। एडीआरएम, इंडोर अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सहित इंपैनल्ड अस्पतालों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों से कहा गया कि रेलवे बोर्ड के दिशानिर्देशों के अनुसार रेलकर्मियों व पेंशनभोगियों के साथ सहयोग करें।
कैशलेस इलाज के लिए ये दस्तावेज जरूरी
कैशलेस इलाज के लिए रेलकर्मियों व पेंशनधारकों को यूएमआईडी कार्ड, पंजीकृत मोबाइल नंबर, जिस पर ओटीपी आएगा, रखना अनिवार्य होगा। इलाज के लिए सीधे किसी भी अधिकृत निजी अस्पताल जाएं। कार्ड दिखाने व ओटीपी बताने के बाद बगैर भुगतान इलाज शुरू होगा। इलाज के बाद अस्पताल रेलवे अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर सूचित करेगा। रेफर के मामलों में निकटतम रेलवे अस्पताल जाएं और चिकित्सक से परामर्श लें। एचएमआईएस मोबाइल ऐप से डिजिटल रेफरल लेटर जारी किया जाएगा, जिसके बाद निजी अस्पताल में इलाज करा सकते हैं। इसके अलावा सभी रेफरल पैन-इंडिया मान्य हैं। उपचार संबंधित सारे दस्तावेज अब डिजिटल माध्यम से समन्वयित किए जा रहे हैं। पीजीआई में भर्ती मरीजों के लिए कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।