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Lucknow News: भारती सहकारी गृह निर्माण के पूर्व सचिव व बेटे पर केस

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लखनऊ। जमीन को लेकर फर्जीवाड़ा करने के 36 वर्ष पुराने मामले में भारती सहकारी गृह निर्माण के तत्कालीन सचिव व उसके बेटे के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और धमकी की धारा में शुक्रवार को वजीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई। डीसीपी पश्चिमी विश्वजीत श्रीवास्तव के आदेश पर कार्रवाई हुई है।
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वजीरगंज के लक्ष्मण प्रसाद रोड निवासी शाह आलम मुताबिक, अक्तूबर 1989 को उन्होंने व पत्नी नबीद ने प्लॉट खरीदने के लिए गाजीपुर थानाक्षेत्र के सर्वोदयनगर स्थित भारती सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड में संपर्क किया। यहां उनकी मुलाकात सोसाइटी के तत्कालीन सचिव रणजीत सिंह से हुई। उससे शाह आलम ने पत्नी के नाम पर गोमतीनगर के खरगापुर में जमीन खरीदी।

कई वर्षों बाद वह कब्जा लेने पहुंचे तो पता चला कि रणजीत ने उनकी जमीन पहले ही गोंडा के यदुनाथ सिंह को फरवरी 1998 में बेच दी थी। धोखाधड़ी की जानकारी पर नबीद ने 21 जुलाई 2017 को वजीरगंज थाने में रणजीत और यदुनाथ के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, गाली-गलौज और धमकी का केस दर्ज कराया।
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सरकार की जमीन अपनी बताकर बेच दी

शाह आलम ने बताया कि रणजीत को फंसता देख उसके बेटे अमित ने समझौता करने की बात कहते हुए उन्हें बीकेटी के नवीकोट नंदना स्थित अपनी जमीन का उनके नाम बैनामा करने की बात कही। नबीद के केस वापस लेने पर अमित ने मार्च 2018 में बैनामा कर दिया। इसमें पीड़ित के करीब 1.35 लाख रुपये स्टांप शुल्क व पंजीकरण में खर्च हो गए। दंपती कब्जा लेने गए तो पता चला कि उनकी जमीन सरकार जुलाई 2014 को अधिग्रहित कर चुकी थी।



सदमे में पत्नी की चली गई जान

दोबारा ठगी से नबीद सदमे में चली गईं और पांच अप्रैल 2019 को उनकी मौत हो गई। शाह आलम का आरोप है कि रकम मांगने पर नवंबर 2024 को सब रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर रणजीत व अमित ने रिवॉल्वर तानकर हत्या की धमकी दी। मामले की शिकायत डीसीपी पश्चिमी से की। जांच के बाद वजीरगंज पुलिस को कार्रवाई का आदेश दिया गया। इंस्पेक्टर राजेश त्रिपाठी के मुताबिक मामले की विवेचना दरोगा नीरज कुमार कर रहे हैं। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होगी।
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