लखनऊ। जानकीपुरम स्थित नारायणा एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में बृहस्पतिवार को हुए हंगामे के बाद डीजीएम ने पूर्व प्रिंसिपल सुप्रिया पांडेय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें 10 अन्य भी नामजद हैं। इंस्पेक्टर प्रभातेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि केस दर्ज कर मामले की विवेचना की जा रही है। पुलिस को कुछ वीडियो मिले हैं।
नारायणा स्कूल के डीजीएम आशुतोष कुमार का आरोप है कि कॉलेज से हटाए जाने के बाद बृहस्पतिवार को सुप्रिया पांडेय अपने साथियों और कुछ बच्चों के अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंची थीं। उनके साथ नीलिमा तिवारी, सुमित, भौमिक, देव, सैवी पांडेय, इशिता, प्रशून वर्मा, ओम देव, पार्थ व काव्या चौधरी समेत अन्य लोग थे।
आरोप है कि सुप्रिया और उनके साथियों ने स्कूल परिसर में घुसते ही कर्मचारियों पर हमला कर दिया। विरोध पर गाली-गलौज व अभद्रता की। प्रबंधन ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस के पहुंचने के बाद भी हंगामा जारी रहा। पुलिस ने किसी तरह से दोनों पक्षों को शांत कराया।
इंस्पेक्टर का कहना है कि दोनों पक्षों में पुराना विवाद चल रहा है। स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएंगे। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व प्रधानाचार्या बोलीं, अधिक वेतन के कारण हटाया
लखनऊ। जानकीपुरम स्थित नारायणा एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में प्रधानाचार्या के हटाए जाने के बाद बढ़े विवाद के दूसरे दिन अलग-अलग बाते निकलकर समाने आईं। पूर्व प्रधानाचार्या सुप्रिया पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि उनका वेतन 1.84 लाख था, इसलिए प्रबंधन ने उन्हें बहाने से हटाया है। ताकि कम वेतन वाले को रखा जा सके। वहीं इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन सुधीर हलवासिया ने उनके आरोप को बेबुनिया बताया। कहा कि सुप्रिया पांडेय इंस्टीट्यूशंस के नियमों के विपरीत काम कर रही थीं। कई अभिभावक शिकायत कर चुके थे। प्रधानाचार्या को तीन बार नोटिस भी दिया गया था, सुधार न होने के बाद उन्हें हटाने का निर्णय लेना पड़ा।