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24 लाख हड़पने का मामला: डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक, स्टेनो समेत पांच पर धोखाधड़ी का मुकदमा

Wed, 27 Nov 2024 06:38 PM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच

सार

मामले में बलरामपुर जिले में शिक्षक पद पर तैनाती के नाम पर 24 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगा है। नानपारा कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक, स्टेनो, राहत इंटर कॉलेज अल्पसंख्यक संस्थान के प्रबंधक, प्राधानाचार्य समेत पांच लोगों पर कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को नानपारा कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। इन सभी पर आरोप है कि बलरामपुर जिले के एक कॉलेज में अल्पसंख्यक सहायक पद पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर 24 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की है।

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नानपारा कोतवाली के मिरयासी टोला निवासी गुरफान खान की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार वर्ष 2016-17 में उनकी मां मरजिया बेगम राहत इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत थी। आरोप है इसी दौरान वैध भगवानदीन इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजवती ने बलरामपुर जिले के युसूफ इंटर कॉलेज में अल्पसंख्यक सहायक का पद खाली होने की बात बताते हुए अपने परिचित गोंडा जिले के बनवटिया सुनहरा सुगौती निवासी वरिष्ठ लिपिक कृष्ण कुमार मिश्रा के माध्यम से रुपया देकर बेटे को भर्ती कराने की बात करते हुए मुलाकात कराई।

इनके द्वारा विभिन्न प्रक्रिया पूर्ण करते हुए आरटीजीएस और अन्य माध्यमों से कई बार में कुल 24 लाख 50 हजार रुपया ले लिया। इसके बाद वर्ष 2017 में राहत इंटर कॉलेज नानपारा में रिक्त हिन्दी एलटी ग्रेड सहायक अध्यापक के पद पर विद्यालय में नियुक्ति करवाने का आश्वासन देकर उक्त विद्यालय के प्रबंधक अरशद खान व प्रधानाचार्य से साक्षात्कार करवाया। कुछ समय बीतने के बाद वरिष्ठ लिपिक केके ने अपने कार्यालय में तैनात स्टेनो बस्ती वासदेव कुंवर गांव निवासी हरेंद्र सिंह को साढ़े छह लाख रुपये उनसे दिलवा दिए।
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वर्ष 2019 में उक्त लोगों ने सात जुलाई 2017 का फर्जी नियुक्ति पत्र राहत इंटर कॉलेज कार्यालय में सौंपते हुए अगले दिन से संस्था में आकर कार्य करने को कहा। वहां पर दूसरे दिन विद्यालय पहुंचने पर उनसे कोई कार्य नहीं लिया गया और वे बराबर विद्यालय जाते रहे। इसी दौरान कोरोना महामारी आने से विद्यालय बंद हो गया। उनके खाते में वेतन न आने पर संपर्क किया तो लिखापढ़ी चलने की बात बताते हुए कुछ दिन इंतजार करने की बात बोली गई। काफी समय बीतने के बाद संस्था में काम करने वाले अन्य लोगों से नियुक्ति न होने और धोखाधड़ी होने का पता चला। उक्त लोगों से संपर्क करने पर ढाई लाख रुपया वापस कर शेष रुपया देने से इंकार कर दिया। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर नानपारा कोतवाली पुलिस ने आरोपियों पर धोखाधड़ी समेत अन्य धारा में केस दर्ज किया है।

मामले की चल रही जांच
नानपारा कोतवाल प्रदीप सिंह ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर डीआईओएस कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक, स्टेनो समेत पांच लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, जांच जारी है।
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दोनों कर्मचारी हो चुके सेवानिवृत्त
डीआईओएस मनोज कुमार अहिरवार ने कहा कि दोनों कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके है। मामले की जानकारी नहीं है, जानकारी कर सूचित किया जाएगा।

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