उप्र राजकीय निर्माण निगम के सेवानिवृत्त इकाई प्रभारी सुरेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज किया है। उनके खिलाफ शासन ने मई, 2019 में खुली जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने अपनी जांच में आरोप सही पाए जाने पर शासन से मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। शासन की अनुमति पर मंगलवार को एसके तिवारी के खिलाफ विजिलेंस के मेरठ सेक्टर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
विजिलेंस की खुली जांच में सामने आया है कि गाजियाबाद के नेहरू नगर निवासी एसके तिवारी ने वर्ष 2007 से 2011 के बीच अपनी आय के समस्त ज्ञात एवं वैध स्रोतों से कुल 32,22,428 रुपये की आय अर्जित की, जबकि इस अवधि में चल-अचल संपत्तियों को अर्जित करने और भरण पोषण में कुल 1,00,45,051 रुपये व्यय किए गए। इस तरह उन्होंने अपनी कुल आय से 68,22,623 रुपये अधिक व्यय किए। अपनी कुल आय से 211.72 प्रतिशत अधिक खर्च करने पर जब उनसे जवाब मांगा गया, तो उन्होंने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। बताते चलें कि एसके तिवारी अपर परियोजना प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
बुलंदशहर के सीएमओ कार्यालय के गैर चिकित्सीय सहायक पर केस
विजिलेंस के मेरठ सेक्टर ने बुलंदशहर के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में तैनात गैर चिकित्सीय सहायक मुनेश चंद्र के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया है। शासन के निर्देश पर विजिलेंस की खुली जांच में हापुड़ निवासी मुनेश चंद्र की वर्ष 1999 से 2019 के बीच समस्त वैध स्रोतों से कुल आय 1,43,00,137 रुपये पाई गई, जबकि इसी अवधि में उन्होंने 1,75,02,623 रुपये चल-अचल संपत्तियों और भरण पोषण पर व्यय किए। अपनी कुल आय से 32.02 लाख रुपये अधिक व्यय करने पर जब उनसे जवाब-तलब किया गया, तो उन्होंने कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। शासन की अनुमति पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।