उत्तर प्रदेश में कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर बनाए गए इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम पर घोर लापरवाही सामने आई है। सरकारी पड़ताल में इन केंद्रों पर न तो नोडल अधिकारी मिले और न ही सहायक नोडल अधिकारी। ऐसे 40 जिलों के जिलाधिकारियों से सरकार ने जवाब तलब किया है।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम की सक्रियता की पड़ताल के लिए अपने ऑफिस के अधिकारियों को निर्देशित किया था।
मुख्यमंत्री सचिवालय के अफसरों ने शुक्रवार को लखनऊ छोड़ प्रदेश के सभी इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के फोन पर संपर्क कर इसकी पड़ताल की। इन कंट्रोल रूम के लिए जिलास्तर से नोडल अधिकारी व सहायक नोडल अधिकारी तैनात हैं। पड़ताल में 74 में से आठ जिलों के कंट्रोल रूम में नोडल अधिकारी स्वयं मिले। 26 में सहायक नोडल अधिकारी मिले। 21 जिलों में न नोडल अधिकारी मिले न ही सहायक नोडल अधिकारी।
यहां क्लर्क ग्रेड के कर्मियों ने फोन उठाया, 19 जिलों के कंट्रोल रूम का फोन ही नहीं मिला अधिकारी ने बताया कि जहां क्लर्क ग्रेड के कर्मियों ने फोन उठाया वहां और जहां का फोन ही नहीं मिला, ऐसे 40 जिलों के डीएम से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके साथ ही सभी जिलों के डीएम को इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम की व्यवस्था पुख्ता करने के निर्देश अलग से दिए जा रहे हैं।