फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गंदे नाले की सफाई करने में कुछ इस तरह जान जोखिम में डाल देते हैं मजदूर

Fri, 03 Jun 2016 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
गंदे नाले में उतरता मजदूर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
मौलवीगंज वार्ड में 40 फीट गहरा अंडरग्राउंड नाला उफना गया है। इलाके में कई-कई फीट पानी भर गया है। चोक नाले की सफाई और भरे पानी को निकालने के लिए नगर निगम ने मजदूर लगा दिए हैं, लेकिन बिना सुरक्षा उपकरण।
विज्ञापन


दो दिन पहले ही इंदिरानगर में बिना सुरक्षा उपकरण दिए ही मजदूरों को नाले में उतारा गया था। इस दौरान एक सफाईकर्मी की मौत हो गई थी। 

इस घटना से भी नगर निगम नहीं चेता और फिर वही गलती दोहरा दी। हालांकि फिर नाला उफनाने से हुए जलभराव को लेकर नगर निगम ने बृहस्पतिवार को सेना और एनडीआरएफ से संपर्क किया। 

मौके पर पहुंची दोनों टीमों ने नगर निगम के ही काम को पर्याप्त बताते हुए सहयोग देने से मना कर दिया। सेना और एनडीआरएफ ने यह भी कहा कि वह इस तरह के भूमिगत नाले की सफाई को लेकर एक्सपर्ट नहीं हैं।
विज्ञापन


गौसनगर का भूमिगत नाला छह दिन पहले चोक हुआ था। तब से नगर निगम की टीम जलभराव को दूर करने में लगी है। इसके बावजूद यह समस्या दूर नहीं हो पा रही है। 

नाला भूमिगत होने और उस पर मकान बने होने के कारण उसकी मशीन से सफाई करने में अड़चन आ रही है। जलभराव को दूर करने के लिए नगर निगम टीम ने भूमिगत नाले के पानी को दोनों ओर से रोक कर मजदूरों से उनकी सफाई का काम शुरू कराया है।
विज्ञापन

नाले में नहीं जा सकते लाइफ जैकेट पहनकर

नाले की सफाई करता मजदूर - फोटो : amar ujala
नाले के अंदर थर्माकोल, रजाई-गद्दा, प्लास्टिक व रबर आदि भरी हुई है। इसके कारण नाला चोक हो गया है। मंगलवार को दोपहर में डीएम ने निरीक्षण कर जल्द से जल्द समस्या दूर करने को कहा था।

उसी दिन देर रात समस्या दूर कर दी गई थी, लेकिन बुधवार को यह फिर उफना गया और इलाके में जलभराव हो गया। अपर नगर आयुक्त अवनीश सक्सेना ने बताया कि एनडीआरएफ और सेना के अधिकारियों को बुलाया गया था। 

उन्होंने कहा कि हम इस काम के लिए एक्सपर्ट नहीं हैं। नगर निगम जिस तरह ब्लॉकेज को दूर करने का काम कर रहा है, वही सही तरीका है। धीरे-धीरे ही कचरे को निकालकर भूमिगत नाले मे सफाई की जा सकती है। 

प्रभारी नगर आयुक्त के अवनीश सक्सेना का कहना है लाइफ जैकेट नाले में पहन कर नहीं जा सकते, इसलिए कर्मचारी बेल्ट बांधकर जाते हैं।

पानी कम हो जाता है तब कर्मचारी उतारे जाते हैं। दस पंप लगाए गए हैं। यदि पानी बढ़ता भी है तो पंप से तुरंत बाहर निकाला जा सकता है। सुरक्षा को लेकर जो भी उपाए हैं, उनका पालन किया जा रहा है।   
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें