जवाहरबाग में कब्जा करने वाले रामवृक्ष यादव और उसके समर्थकों के खिलाफ लोगों ने पुलिस से कई बार शिकायतें कीं, रिपोर्ट तक दर्ज कराई पर खाकी की नींद नहीं टूटी।
जवाहरबाग में कब्जा करने वाले रामवृक्ष यादव और उसके समर्थकों के खिलाफ लोगों ने पुलिस से कई बार शिकायतें कीं, रिपोर्ट तक दर्ज कराई पर खाकी की नींद नहीं टूटी। नतीजा यह निकला कि उनके हौसले बुलंद होते गए और उनकी दहशत बढ़ती गई। अगर पुलिस तभी चेत जाती और शिकायतों पर कोई कार्रवाई करती तो शायद दोनों शहीद पुलिस अफसर सिटी एसपी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार आज जीवित होते।
करीब पांच साल पहले 17 जून 2011 को जय गुरुदेव के एक शिष्य सुरेश चंद्रा पर रामवृक्ष यादव के स्वाधीन भारत सुभाष सेना (एसबीएसएस) के सदस्यों ने आश्रम में ही हमला कर दिया था। पुलिस ने इस मामले में रामवृक्ष और उसके 15 साथियों पर हत्या की कोशिश और हंगामा करने का केस तो दर्ज किया था, पर न तो किसी को गिरफ्तार किया, न ही कोई कार्रवाई की।
यही नहीं, मार्च 2014 के बाद वन विभाग के अफसरों ने मथुरा के सदर पुलिस स्टेशन में रामवृक्ष और उसके साथियों के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज करवाईं। इनमें उन सरकारी अफसरों से मारपीट का मामला भी था, जो निष्कासन नोटिस का पालन करवाने आश्रम गए हुए थे।