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लोहिया संस्थानः कराह रही गर्भवती को कतार में लगाया, वहीं हो गया प्रसव, मचा हड़कंप

Tue, 07 Jul 2020 10:28 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लखनऊ के लोहिया संस्थान में सोमवार को बड़ी लापरवाही सामने आई। यहां प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती को भी कोरोना जांच के लिए कतार में खड़ा करवा दिया गया। इसी दौरान उसका प्रसव हो गया। आनन-फानन महिला को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। लोहिया संस्थान प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है।
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वहीं, डॉक्टर समेत पांच लोगों को ड्यूटी से हटा दिया गया। साथ ही स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उधर, जच्चा-बच्चा की स्थिति ठीक है। इंदिरानगर सेक्टर ए निवासी कल्पना दीक्षित सुबह करीब 8 बजे लोहिया संस्थान पहुंचीं। वह प्रसव पीड़ा से कराह रही थीं, फिर भी डॉक्टर घंटे भर तक उसे टरकाते रहे।

बाद में कोरोना जांच के लिए कहा गया। आरोप है कि जांच के लिए रुपये जमा करने को कहा गया। पति रुपयों का इंतजाम करने चले गए। इसी दौरान कतार में लगी गर्भवती को रक्तस्राव होने लगा। तेज दर्द के बाद कल्पना वहीं गिर पड़ीं। तीमारदार की सूचना पर डॉक्टर व कर्मचारी पहुंचे तब तक प्रसव हो गया था। पति अमन दीक्षित का आरोप है कि एक दिन पहले भी वह इमरजेंसी में आए थे और पत्नी को भर्ती करने की गुजारिश की थी, लेकिन डॉक्टरों ने लौटा दिया। सोमवार को भी उन्हें घंटों दौड़ाया गया।
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दोषी के खिलाफ होगी कार्रवाई

मामले की जानकारी मिलते ही डॉक्टर व कर्मचारी पहुंचे और जच्चा-बच्चा को इमरजेंसी में भर्ती कराया। दोपहर बाद तक संस्थान के अधिकारी कुछ भी बताने से बचते रहे। एक अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि ऐसा कोई मामला ही नहीं है।

जच्चा-बच्चा की स्थिति ठीक है। उनकी कोरोना की भी जांच कराई गई है। वहीं, एक कंसल्टेंट, दो सीनियर व दो जूनियर रेजिडेंट को ड्यूटी से हटा दिया गया है। जांच कमेटी को जो दोषी मिलेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। - डॉ. श्रीकेश सिंह, मीडिया प्रभारी लोहिया संस्थान

जांच कमेटी पर उठे सवाल

मामले की जांच की जिम्मेदारी हॉस्पिटल ब्लॉक की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सरिता सक्सेना को सौंपी गई है। वह तीन दिन में रिपोर्ट देगी। प्रसूता के परिजनों का कहना है कि चिकित्सा अधीक्षक खुद पूरी व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होता है। दूसरी बात यह है कि वह खुद महिला रोग विभाग में कार्यरत हैं। ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। 
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