बलरामपुर अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में मरीज के घुटने में परेशानी होने पर उसका कूल्हा बदलने की तैयारी कर ली गई। जांच के बाद सर्जरी की डेट देने के साथ दो यूनिट खून भी चढ़ा दिया गया। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ही तीमारदार ने मरीज को निजी आर्थोपेडिक सर्जन के साथ कई और डॉक्टरों को रिपोर्ट दिखाई तो उन्होंने कूल्हा न बदलवाने की सलाह दी। इसके बाद तीमारदार के विरोध पर बलरामपुर में सर्जरी रोक मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। लापरवाही का खुलासा होने पर अफसर संबंधित डॉक्टर को बचाने में लगे हैं।
घुटने में परेशानी पर उन्नाव की शाइस्ता (34) दो जून को केजीएमयू पहुंची तो बलरामपुर अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में दिखाने की सलाह दी गई। वहां आर्थोपेडिक विभाग के डॉक्टर ने जांच रिपोर्ट देखने के बाद कूल्हा बदलने की सलाह दे डाली और 85 हजार रुपये का खर्च बताया। मरीज को 15 जून को भर्ती करा दिया। सर्जरी से पहले जांच में हीमोग्लोबिन कम निकलने पर दो यूनिट खून भी चढ़ा दिया गया।
तीमारदार मो. कमाल ने बताया कि बलरामपुर में भर्ती होने के दौरान ही शाइस्ता को प्राइवेट आर्थोपेडिक सर्जन को दिखाने ले गया। उन्हें रिपोर्ट दिखाई तो कूल्हे की बनावट थोड़ा अलग होने की बात कही, लेकिन इसे न बदलवाने की सलाह दी। इस पर घुटने के दर्द की दवा लिखकर लौटा दिया गया। इसके बाद अस्पताल से मरीज को डिस्चार्ज करा लिया गया।