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लखनऊ: दो मिनट तक कैमरे की नजर से ओझल रहा योगेंद्र, अचानक गिरकर छटपटाता दिखा: इसी समय अवधि पर छिपा है गहरा राज

Wed, 23 Sep 2026 10:25 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

राजधानी लखनऊ में होमगार्ड भर्ती के दौरान अभ्यर्थी योगेंद्र दो मिनट तक कैमरे की नजर से ओझल रहा। फिर अचानक गिरकर छटपटाता दिखा। इसी समय अवधि पर गहरा राज छिपा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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होमगार्ड भर्ती के दौरान अभ्यर्थी योगेंद्र की मौत का मामला। - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी.
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में होमगार्ड भर्ती के दौरान अभ्यर्थी योगेंद्र सिंह की मौत का रहस्य 2 मिनट 6 सेकंड के उस हिस्से में छिपा हो सकता है, जहां घटनास्थल का कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है। पुलिस को मिले फुटेज में योगेंद्र दौड़ के दौरान गिरते, दूसरे अभ्यर्थियों की मदद से उठकर आगे जाते और बाद में एक युवक से बहस करते दिख रहे हैं। इसके बाद वह कैमरे की नजर से ओझल हो जाते हैं। 2 मिनट 6 सेकंड बाद वह दूसरे कैमरे में अचानक गिरकर छटपटाते नजर आते हैं। इसी बीच उनके गले में पानी की बोतल कब और कैसे फंसी, पुलिस इसकी जांच कर रही है।

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पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 15 सितंबर को महानगर स्थित 35वीं वाहिनी पीएसी ग्राउंड में भर्ती दौड़ के दौरान सीतापुर के रामकोट मढ़िया रहीमपुर निवासी योगेंद्र गिर गए थे। एक अभ्यर्थी ने उन्हें उठाकर फिनिश लाइन तक पहुंचाया। दूसरे अभ्यर्थी ने भी उन्हें सहारा दिया। इसके बाद योगेंद्र कुछ देर घुटनों के बल चलते दिखाई दिए। 

अचानक गिरकर छटपटाते दिखाई दिया

सीसीटीवी में सुबह 11:22:18 बजे वह स्टैंड में दिखाई देते हैं, जहां एक अभ्यर्थी से उनकी बहस होती है। इसके बाद कैमरे की कवरेज खत्म हो जाती है। अगली फुटेज 11:24:24 बजे की है। इसमें योगेंद्र कुछ अभ्यर्थियों के बीच चलते हुए अचानक गिरकर छटपटाते दिखाई देते हैं।

क्या है डार्क एरिया

दोनों कैमरों की कवरेज के बीच का 2 मिनट 6 सेकंड का हिस्सा ऐसा स्थान है, जहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। यानी इस अवधि में योगेंद्र के साथ क्या हुआ, इसका प्रत्यक्ष वीडियो साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है। जांच के लिहाज से यही हिस्सा अहम है, क्योंकि इसी दौरान वह स्टैंड से निकलकर उस जगह पहुंचे, जहां अगले कैमरे में वह गिरते दिखाई दिए।

भाऊराव देवरस संयुक्त चिकित्सालय में दिया गया था सीपीआर

एसीपी महानगर अंकित वर्मा ने बताया कि योगेंद्र को अचेत अवस्था में भाऊराव देवरस संयुक्त चिकित्सालय ले जाया गया। वहां सीपीआर दिया गया और बलरामपुर अस्पताल रेफर किया गया लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में शरीर पर 12 चोटें मिलीं, जिन्हें रिपोर्ट में घिसटने से लगी चोट बताया गया है। कोई चोट मौत का कारण नहीं पाई गई।

स्टेट मेडिको लीगल सेल से मांगी गई राय

एसीपी के मुताबिक, मौत हत्या, आत्महत्या या हादसे में से किस वजह से हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर स्टेट मेडिको लीगल सेल से विशेषज्ञ राय मांगी गई है। योगेंद्र के गले से मिली 250 एमएल की प्लास्टिक की बोतल फोरेंसिक जांच के लिए भेजी गई है।
 
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भाई का आरोप- किसी से रंजिश नहीं पर हत्या हुई

योगेंद्र के भाई कमल किशोर ने हत्या का आरोप लगाते हुए अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उनका कहना है कि योगेंद्र की किसी से रंजिश नहीं थी और घटना डार्क एरिया में हुई होगी। उन्होंने भर्ती दौड़ में चिकित्सकीय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

केजीएमयू विशेषज्ञ बोले- गहन जांच जरूरी

केजीएमयू के ट्रॉमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज सिंह ने मामले को जटिल बताते हुए गहन जांच की जरूरत बताई है। उनके अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में गले में इतनी बड़ी बोतल पहुंचना असामान्य है और यह पहलू बाहरी बल की संभावना की जांच को जरूरी बनाता है। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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