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बहादुर बेटी: प्रमिता ने कैंसर से जंग लड़ते हुए दी 12वीं की परीक्षा, हासिल किए 97.75 प्रतिशत अंक

Wed, 27 Jul 2022 06:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

बहादुर बेटी प्रमिता ने बताया कि 10 अगस्त 2021 को उसे अपनी बीमारी का पता चला। हर माह कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल में एडमिट होना पड़ता था। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी।
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परिजनों के साथ प्रतिमा तिवारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुश्वारियां कभी हौसले को मात नहीं दे सकती हैं। सेठ एमआर जयपुरिया की कक्षा 12 की मेधावी छात्रा प्रमिता तिवारी ने इस बात को साबित कर दिखाया है। वह सालभर ब्लड कैंसर जैसे गंभीर रोग से जूझती रही, ज्यादातर समय अस्पताल में भर्ती रही, इसके बावजूद ऐसी जीवटता कि पढ़ाई जारी रखी और आईएससी बोर्ड परीक्षा में 97.75 प्रतिशत अंक लाने में कामयाब रही।

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बहादुर बेटी प्रमिता ने बताया कि 10 अगस्त 2021 को उसे अपनी बीमारी का पता चला। इसके बाद एक महीने लखनऊ में इलाज चला, फिर गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। एक पल के लिए लगा कि सबकुछ थम सा गया है, पर मां रेनू व पिता उत्कर्ष तिवारी ने हौसला बढ़ाया। स्कूल में बात की तो टीचर्स ने ऑनलाइन पढ़ाने का आश्वासन दिया। इसके बाद अस्पताल में रहते हुए भी ऑनलाइन क्लास अटेंड करने लगी। सहपाठियों ने स्कूल के नोट्स भेजकर मदद की। इसके अलावा खुद भी नोट्स तैयार कर पढ़ाई की।

हर माह कीमोथेरेपी के लिए अस्पताल में एडमिट होना पड़ता था। इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी। स्कूल में प्रिंसिपल मैम के सहयोग से बोर्ड में बात कर गुरुग्राम में ही बोर्ड परीक्षा का सेंटर शिफ्ट करवाया, ताकि इलाज चलता रहे और परीक्षा देने में भी आसानी हो। जी जान लगाकर परीक्षा दी और अपना बेस्ट दिया। यह परिश्रम रंग लाया और परीक्षा परिणाम में 97.75 प्रतिशत हासिल हुए। मेहनत का फल सामने देख खुशी के आंसू छलक पड़े।
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प्रमिता ने कहा कि इस सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों व दोस्तों को देना चाहूंगी। आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। दूसरे छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि टीचर्स के पढ़ाए कॉन्सेप्ट को ध्यान से समझें। उनके नोट्स का अध्ययन करने के साथ खुद के भी नोट्स बनाने से सफलता पाना आसान हो जाता है। नियमित पढ़ाई करें, ताकि परीक्षा से पहले सब तैयार हो जाए।

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