लखनऊ। एम्स ऋषिकेश में रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एमके गुप्ता के मुताबिक हर मेडिकल कॉलेज में कैंसर का विभाग अनिवार्य किया जाए। इससे मरीजों को उसके जनपद में ही इलाज मिल सकेगा। उपचार के लिए लंबी यात्रा करने से मरीज और उनके परिवार भारी आर्थिक संकट में आ रहे हैं। प्रो. गुप्ता सोमवार को केजीएमयू के रेडिएशन आंकोलॉजी विभाग के स्थापना दिवस समारोह में ऑरेशन के दौरान बोल रहे थे।
प्रो. गुप्ता ने कहा, कैंसर का इलाज चुनिंदा शहरों में ही उपलब्ध है, जबकि हर साल देश में कैंसर के 15 लाख नए मरीज मिलते हैं। इनमें से नौ लाख की मौत हो जाती है। सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों में से एक बड़ा हिस्सा इलाज बीच में ही छोड़ देता है। इसकी वजह उनके नजदीक उपचार उपलब्ध न होना है।
दूसरे शहर में इलाज के लिए जाने पर उनकी नौकरी, खेती और अन्य काम बाधित होता है। सरकार ने हर जनपद में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रयास किया है। इसमें काफी हद तक सफलता मिली है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग हर मेडिकल कॉलेज में कैंसर का विभाग अनिवार्य कर दे तो इसका काफी फायदा मिलेगा।
कई मेडिकल कॉलेजों के बीच कुछ महंगी मशीनें साझा भी की जा सकती हैं। शुरुआत में एक विशेषज्ञ से काम चलाया जा सकता है। समारोह में एसजीपीजीआई के डीन प्रो. शालीन कुमार ने विभाग से जुड़ी यादें साझा कीं। विभाग के कर्मियों को पुरस्कार दिए गए। प्रो. सुधीर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
केजीएमयू में लगेगी लीनियर एक्सीलरेटर मशीन
केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग में जल्द लीनियर एक्सीलरेटर मशीन लगेगी। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि इससे सिंकाई के लिए इंतजार करने वाले मरीजों को राहत मिलेगी। विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव गुप्ता ने बताया कि इस मशीन से कैंसर मरीजों की सिंकाई हो सकेगी। प्रो. राजीव गुप्ता ने बताया कि में एक साल में 3542 नए मरीज, 15,740 मरीजों का फॉलोअप और 4795 मरीज डे केयर में देखे गए।