चिड़ियाघर के अंदर से जाने वाला दशकों पुराना नाला अब यहां से शिफ्ट किया जाएगा। नाले की दुर्गंध व वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका को देखते हुए शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया है।
इस पर 7.15 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। नगर निगम इसकी कार्ययोजना तैयार कर रहा है। शासन से वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
करीब दो महीना पहले काले हिरणों के अचानक हुई मौतों के बाद यह मुद्दा तेजी से उठा है और शासन भी इसको लेकर गंभीर है।
सिविल अस्पताल के पास से होकर आने वाला यह नाला जू के अंदर से होते हुए लोहिया पथ के किनारे हैदरकैनाल पर मिलता है। कार्ययोजना बनाने वाले नगर निगम के अभियंता प्रमोद वर्मा का कहना है नाले को डायवर्ट करना आसान नहीं है।
काफी पुराना नाला है और उसको लेवल मिलाना कठिन है। नाले की ढाई मीटर ढाल है। इसको देखते हुए जल निकासी के लिए दो तकनीकी अपनानी पड़ेंगी। कुछ हिस्से में तो ईंट का नाला ही बनाना पड़ेगा ओर कुछ हिस्से में हॉज पाइप डालनी पड़ेगी।
दो तकनीकी इसलिए प्रयोग करनी पड़ेगी, ताकि मुख्य मार्ग पर आवागमन अधिक समय तक बाधित न हो। इस मार्ग पर अस्पताल भी है। इसको ध्यान में ही रखकर कार्ययोजना बनाई जा रही है।
यदि पूरा नाला बनाया जाएगा तो काफी समय लगेगा। इसलिए अस्पताल के सामने ईंट का नाला बनाने की बजाए भूमिगत हॉज पाइप डाला जाएगा।