यूपी बोर्ड विद्यालयों को मान्यता प्रदान करता है। स्कूल हिंदी माध्यम से पढ़ाएंगे या अंग्रेजी से इसकी मान्यता नहीं दी जाती। विभाग के पास न तो अंग्रेजी माध्यम से संचालित विद्यालयों का आंकड़ा है और न ही यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की सही स्थिति की जानकारी। बोर्ड फॉर्म भरवाने के समय विद्यार्थी से पूछा जाता है कि वह अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देना चाहता है या हिंदी से। उसी आधार पर छात्रों को प्रश्नपत्र मुहैया कराए जाते हैं।
अंग्रेजी माध्यम के छात्र निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ने के लिए मजबूर हैं। एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम भले ही अंग्रेजी माध्यम में नहीं है, लेकिन निजी प्रकाशकों की किताबें अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध हैं। ऐसे में छात्र निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों से ही पढ़ने को विवश हैं। एक तरफ विभाग इनके लिए अंग्रेजी माध्यम के किताब उपलब्ध नहीं करा पा रहा है तो दूसरी तरफ निजी प्रकाशकों की किताबें इस्तेमाल न करने का निर्देश दे रहा है।