लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। विवि के दो हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स की छात्रवृत्ति विवि और एनआईसी के बीच फंस गई है।
स्टूडेंट्स ने बताया कि एनआईसी की वेबसाइट पर छात्रवृत्ति के फार्म का स्टेटस देखने पर स्क्रूटनी रिजल्ट विकल्प में सस्पेक्ट लिखकर आ रहा है। एनआईसी की तरफ से कारण ‘रिजल्ट नॉट अपलोडेड आर फेल्ड स्टेटस इन यूनिवर्सिटी डाटा’ बताया जा रहा है।
विवि के अधिकारियों का कहना है कि इसी प्रकार की समस्या एक बार पहले भी आ चुकी है। हालांकि, तब संबंधित डाटा एनआईसी को उपलब्ध करा दिया गया था। अब दोबारा फिर से वही समस्या बताई जा रही है।
एलयू में हजारों छात्रों की स्कॉलरशिप पर संकट गहराने से उनका कॅरिअर दांव पर लग गया है। पिछले वर्ष भी एलयू और एनआईसी के इस खेल में हजारों स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप नहीं आ पाई थी।
इस वर्ष भी स्टूडेंट्स बार-बार आ रही समस्याओं के कारण परेशान हैं। इस बीच विवि एनआईसी को दोषी ठहरा रहा है तो एनआईसी की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि विवि ने डाटा ही नहीं उपलब्ध कराया है।
दूसरी तरफ विद्यार्थियों की समस्या को देखते हुए विवि के अधिकारी कह रहे हैं कि हम फिर से डाटा भेजने को तैयार हैं, बशर्ते इसके लिए आदेश के साथ एक बार फिर डेट जारी की जाए।
उपलब्ध विकल्पों में भी काफी उलझन
लखनऊ यूनिवर्सिटी
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स्कॉलरशिप फॉर्म में मांगी गई सूचनाएं गलत पाए जाने पर इस प्रकार की समस्या आ रही है। हालांकि, इसके लिए स्टूडेंट्स को अवसर दिया गया था कि वे दोबारा सही जानकारी भरकर संस्थान को उपलब्ध कराएं, जिसके बाद संस्थान की तरफ से सभी जानकारियों की जांच पड़ताल करके एनआईसी को भेजा जा चुका है।
इसके बावजूद एनआईसी की तरफ से बार-बार डाटा उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है। हालांकि, स्टूडेंट्स दो बार अपनी सारी जानकारियां और दस्तावेज अपने संस्थान को दे चुके हैं। अब तीसरी बार वही समस्या एक बार फिर विद्यार्थियों के सामने खड़ी है।
छात्रवृत्ति फॉर्म भरते समय उपलब्ध विकल्पों में भी काफी उलझन हैं। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो डिप्लोमा कोर्स के विद्यार्थियों को फॉर्म भरते समय उनके डिप्लोमा की जानकारी नहीं उपलब्ध कराई जा रही है।
सिर्फ डिप्लोमा का विकल्प आने के कारण विद्यार्थी परेशान हैं कि यह कौन-सा डिप्लोमा है। उसी प्रकार कुछ विषय सेल्फ फाइनेंस के हैं। ऐसे में स्नातक कर रहे छात्रों के सामने समस्या आ रही है। विवि में भूगोल विषय सेल्फ फाइनेंस है और हिंदी नियमित।
बतौर उदाहरण ये दोनों विषय लेने वाले विद्यार्थी इस उलझन में हैं कि वह सेल्फ फाइनेंस भरें या नियमित। वहीं, कुछ विद्यार्थियों के पास आधार कार्ड नहीं हैं, लेकिन ये विकल्प अनिवार्य कर दिया गया है। इन्हीं सभी विसंगतियों के कारण भी परेशानी आ रही है।
छात्रवृत्ति की विसंगतियों के बीच जीरो फीस पर प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। गौरतलब है कि इन विद्यार्थियों को समाज कल्याण द्वारा छात्रवृत्ति के साथ कोर्स की फीस भी दी जाती है, जिसे जमा करने के बाद ही इनको अगले वर्ष में प्रवेश की अनुमति और अंकपत्र उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में इन विद्यार्थियों के समक्ष गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
‘स्टूडेंट्स का डाटा एनआईसी को भेजा जा चुका है। समस्या कहां आ रही है, इस पर बात करनी होगी। अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है। अगर विभाग अंतिम तारीख बढ़ा देगा तो हम दोबारा डाटा भेज देंगे। स्टूडेंट्स की समस्या के लिए समाज कल्याण विभाग से भी बात की जाएगी।’ -रामकुमार, कुलसचिव