लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षिक सत्र-2017-18 में सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से गुजरना होगा। जेआरएफ और नेट अभ्यर्थियों को भी प्रवेश परीक्षा देनी होगी, लेकिन उन्हें क्रमश: पांच और तीन अतिरिक्त अंक प्रदान किए जाएंगे।
एलयू में शुक्रवार को हुई एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद से विवि का नया पीएचडी ऑर्डिनेंस पास किया गया। एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद की मंजूरी के बाद पीएचडी दाखिलों की राह खुल गई है।
प्रवेश प्रक्रिया अधिकतम 100 नंबर की होगी। इसमें से 60 नंबर की प्रवेश परीक्षा होगी। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा में कम से कम 50 फीसदी नंबर लाने होंगे।
इससे कम नंबर लाने वाले आगे की प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे। 20 नंबर एकेडमिक रिकॉर्ड के लिए निर्धारित होंगे। ये नंबर स्नातक और परास्नातक में मिले नंबरों के आधार पर दिए जाएंगे।
एकेडमिक्स इंडेक्स के अनुसार स्नातक और परास्नातक स्तर पर 50 फीसदी से ज्यादा नंबर होने पर अभ्यर्थी को पांच-पांच नंबर मिलेंगे। 60 फीसदी से ज्यादा नंबर होने पर आठ और 75 फीसदी से ज्यादा नंबर होने पर 10-10 नंबर अभ्यर्थी को मिलेंगे। बाकी बचे 20 नंबर साक्षात्कार के आधार पर दिए जाएंगे। साक्षात्कार प्रक्रिया में रिसर्च प्रपोजल, पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और पर्सनल इंटरव्यू शामिल होंगे।
बहुविकल्पीय होगी परीक्षा
एलयू ने इस साल पीजी प्रवेश परीक्षा बहुविकल्पीय के बजाय लिखित आधार पर कराई थी। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा था कि शायद पीएचडी प्रवेश परीक्षा भी उसी आधार पर हो, लेकिन ऐसा नहीं होगा। प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा ने बताया कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा पिछले साल की तरह इस साल भी बहुविकल्पीय आधार पर होगी। गलत जवाब देने पर निगेटिव मार्किंग की जाएगी।
जुड़ेंगे अतिरिक्त अंक
एलयू के नए ऑर्डिनेंस के अनुसार जेआरएफ अभ्यर्थी को प्रवेश परीक्षा में अतिरिक्त पांच और नेट अभ्यर्थी को तीन नंबर मिलेंगे। हालांकि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करने के बाद दोबारा प्रवेश परीक्षा में शामिल करने की अनिवार्यता से नेट-जेआरएफ अभ्यर्थियों में थोड़ा रोष है। उनके हिसाब से यह सहूलियत न के बराबर ही है।
प्रवेश परीक्षा को सर्वाधिक महत्व
एलयू के इस साल के पीएचडी ऑर्डिनेंस में सबसे ज्यादा महत्व प्रवेश परीक्षा को दिया जा रहा है। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार अभ्यर्थी को प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी अंक लाने होंगे। विवि के पिछले आर्डिनेंस में भी यह व्यवस्था थी, लेकिन फाइनल मेरिट में प्रवेश परीक्षा के अंक पूरी तरह से छोड़ दिए गए थे। इस साल अंतिम मेरिट में प्रवेश परीक्षा के अंक को न सिर्फ शामिल किया जा रहा है बल्कि 100 नंबर की कुल प्रवेश प्रक्रिया में 60 फीसदी हिस्सा प्रवेश परीक्षा का ही है। पिछले ऑर्डिनेंस में पर्सनल इंटरव्यू, रिसर्च प्रपोजल और पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के आधार पर 60 नंबर दिए गए थे। इस वजह से मनमानी के काफी आरोप भी लगे थे।