लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेजों के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज ब्योरे की जांच कई स्तर पर होगी। इससे न तो गड़बड़ी की आशंका रहेगी और न ही बार-बार कॉलेजों से डेटा लेना होगा।
इस व्यवस्था के तहत पहले कॉलेज इस पोर्टल पर विद्यार्थियों से संबंधित सूचनाएं अपलोड करेंगे, जिसे विद्यार्थी खुद वेरीफाई करेंगे। इसके बाद ही यह डेटा परीक्षा में प्रयोग होगा। इसका फायदा यह होगा कि विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म नहीं भरना होगा।
लविवि प्रशासन की ओर से जारी किए गए पोर्टल में 10 सितंबर तक कॉलेजों को उनके यहां प्रवेशित विद्यार्थियों का नाम, उनके पिता, उनकी जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ई-मेल, लिए गए विषय, कोर्स वाइज प्रवेशित विद्यार्थियों की सूचना, कोर्स वाइज अप्रूव विद्यार्थियों की सूचना आदि अपलोड करनी होगी।
168 में से 151 संबद्ध कॉलेजों ने विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी भेज दी है। यूनिवर्सिटी डेटा रिसोर्स सेंटर (यूडीआरसी) के निदेशक प्रो. अनिल मिश्रा ने बताया कि जब कॉलेज पूरी सूचनाएं अपलोड कर देंगे, तब विवि की ओर से विद्यार्थियों को जारी यूनिक आईडी के माध्यम से मोबाइल नंबर पर एक मैसेज जाएगा। इसी पासवर्ड से स्टूडेंट्स अपनी लॉगिन खोलकर खुद से संबंधित सूचनाओं का सत्यापन कर सकेंगे।
17 कॉलेजों ने नहीं बनाई लॉगिन
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अगर वे कोई संशोधन करते हैं तो इससे संबंधित कागजात भी देने होंगे। इसे कॉलेज से वेरीफाई भी कराया जाएगा। इस तरह दोनों की सूचनाएं क्रास चेक हो जाएंगी। विद्यार्थियों को हर साल की तरह अब परीक्षा फॉर्म नहीं भरने होंगे।
वहीं बार-बार यूनिक डेटा में बदलाव भी नहीं किया जा सकेगा। अगले साल से इसमें सीटों की बाध्यता भी लागू की जाएगी। अगर कॉलेज को 60 सीट का बैच स्वीकृत है तो फिर वे उससे अधिक की जानकारी अपलोड नहीं कर सकेंगे। ये ऑटोमेटिक चेक हो जाएगा।
यूडीआरसी के निदेशक प्रो. मिश्रा ने बताया कि अब तक 17 कॉलेजों ने अपनी लॉगिन नहीं बनाई है। इसकी वजह से वहां से सूचनाएं नहीं मिली हैं। 19 कॉलेजों ने अपनी कोर्स डिटेल नहीं दी है।
कॉलेज प्रशासन नहीं कर सकेंगे विषयों में बदलाव
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जबकि 21 अगस्त को पोर्टल लॉन्चिंग के समय कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने 28 अगस्त को प्राचार्यों की कार्यशाला में कहा था कि हर हाल में 10 सितंबर तक डेटा भेजना है। इसी डेटा के आधार पर परीक्षा फॉर्म भरे जाएंगे। आज फिर इन कॉलेजों को रिमाइंडर भेजा गया है। 10 के बाद सूचनाएं नहीं ली जाएंगी।
पोर्टल में दी गई व्यवस्था के अनुसार अब कॉलेज प्रशासन विद्यार्थियों के विषयों में बाद में बदलाव नहीं कर सकेंगे। कॉलेज प्रशासन को विवि द्वारा एक निर्धारित तिथि तक पूरा डेटा भेजना होगा।
इसके बाद इसे लॉक कर दिया जाएगा, फिर वे इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकेंगे। इसी तरह विद्यार्थियों के लिए डेटा संशोधन की एक तिथि तय होगी, इसके बाद वे भी कोई संशोधन नहीं कर सकेंगे। अभी तक विषयों में बदलाव की प्रक्रिया दिसंबर तक चलती थी।