लखनऊ विश्वविद्यालय के पीएचडी दाखिले साल के अंत तक होते नहीं दिख रहे हैं। नवंबर शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक विवि के पीएचडी अध्यादेश को मंजूरी नहीं मिली है। अंतिम तारीख बीतने के बावजूद पीएचडी की सीट संख्या भी तय नहीं हो सकी है। विवि में बीते साल पीएचडी के दाखिले दिसंबर महीने में हुए थे। इस बार दाखिलों में और देरी की आशंका बनी हुई है।
लविवि के पीएचडी अध्यादेश को अभी तक राजभवन की मंजूरी नहीं मिली है। विवि के पीएचडी अध्यादेश में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करने वाले जेआरएफ को भी प्रवेश परीक्षा देने का प्रस्ताव था। नेट पास अभ्यर्थी को तो सामान्य पीजी स्टूडेंट की तरह ही माना गया है। इस पर राजभवन ने आपत्ति जताई थी। इस वजह से अभी तक राजभवन से अध्यादेश को मंजूरी नहीं मिली है।
लखनऊ विवि के पिछले अध्यादेश में नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से छूट दी गई थी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा पास करने के बावजूद नेट पास अभ्यर्थी को साक्षात्कार के समय सामान्य पीजी छात्र की तरह ही रखा गया था।
विवि ने प्रवेश परीक्षा के नंबर को पूरी तरह से दरकिनार कर दाखिले की अंतिम मेरिट साक्षात्कार के आधार पर ही तैयार की थी। इसलिए बीते साल भी नेट-जेआरएफ अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा था। इस साल भी यह स्थिति न हो इसलिए नया अध्यादेश तैयार किया गया है, लेकिन अभी तक राजभवन की आपत्तियां दूर नहीं हुई हैं। इसलिए इसे मंजूरी भी नहीं मिल सकी है।