केस 1- अर्थशास्त्र विभाग में इस साल पीएचडी की तीन सीटों पर दाखिले के लिए आवेदन मांगे गए थे। एंट्रेंस के बाद 18 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई हुए। 18 में से 11 अभ्यर्थी नेट-जेआरएफ थे। इसके बावजूद अंतिम रूप से जो तीन अभ्यर्थी चुने गए वे सभी साधारण परास्नातक हैं।
केस 2- एलयू के सोशल वर्क विभाग में पीएचडी की 12 सीटों के लिए 44 नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। विवि ने ऑर्डिनेंस के हिसाब से इन्हें प्रवेश परीक्षा से छूट दे दी। 19 अभ्यर्थियों ने एंट्रेंस में सफल होकर इंटरव्यू में भाग लिया। सफल अभ्यर्थी की सूची में नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी और तीन अभ्यर्थी साधारण परास्नातक होने के बावजूद दाखिला पा गए।
केस 3- वीमन स्टडीज विभाग में पीएचडी के लिए चार सीटों पर आवेदन मांगे गए थे। साक्षात्कार के लिए चुने गए आठ अभ्यर्थियों में से पांच नेट या जेआरएफ उत्तीर्ण थे। इसके बावजूद पांच में से चार अभ्यर्थी विवि की साक्षात्कार प्रक्रिया पास करने में असफल रहे। दाखिले के लिए चुने गए चार में से केवल एक नेट-जेआरएफ अभ्यर्थी ही सफल हुआ, बाकी तीन अभ्यर्थी साधारण परास्नातक हैं।
केस 4- एनवायरमेंटल साइंस विभाग में पीएचडी की छह सीटों के लिए 18 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए सफल हुए थे। इनमें से छह नेट या जेआरएफ और 12 साधारण पीजी पास अभ्यर्थी थे। साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद जो सूची प्रकाशित हुई है उसमें साधारण पीजी पास अभ्यर्थियों की संख्या पांच है। नेट और जेआरएफ पास केवल एक ही अभ्यर्थी को दाखिला मिला है।
केस 5- कॉमर्स विभाग में इस साल 43 सीटों पर आवेदन मांगे गए थे। इन सीटों पर 104 अभ्यर्थी साक्षात्कार प्रक्रिया में सफल हुए थे। 104 में से 67 अभ्यर्थी नेट या जेआरएफ पास थे। इसके बावजूद दाखिला पाने वाले अभ्यर्थियों की सूची में साधारण पीजी पास अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा है।