लविवि में पेट्रोलियम उत्पादों पर शोध के लिए ओएनजीसी शोधपीठ और संग्रहालय की स्थापना होगी। ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) इसके लिए विश्वविद्यालय को पांच साल तक प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये की दर से कुल 1.25 करोड़ की आर्थिक सहायता देगा।
पेट्रोलियम पर आधारित संग्रहालय की स्थापना में भी ओएनजीसी सहयोग करेगा तथा उससे संबंधित सामग्री विवि को उपलब्ध कराएगा। लविवि में बुधवार को ओएनजीसी की टीम ने भ्रमण के बाद इसकी घोषणा की है। लविवि को इसका प्रस्ताव तैयार कर देना होगा।
विवि परिसर में ओएनजीसी से मिले 20 करोड़ रुपये की लागत से ओएनजीसी भवन का निर्माण हुआ है। इस भवन में अन्य संस्थानों के साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ जियोरिर्सोसेज की स्थापना हुई है। इसमें एक डिग्री और एक डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं। लविवि को इस भवन में स्थापित अन्य संस्थानों के लिए दो-दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिली है।
लविवि के पास पेट्रोलियम क्षेत्र के विशेषज्ञ न होने की वजह से इस संस्थान को आर्थिक सहायता नहीं मिली थी। लविवि ने यह मुद्दा ओएनजीसी के सामने रखा था। इसके बाद ओएनजीसी इस मामले में आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। इस टीम में समन्वय निदेशक मनोज भरतवाल, जीएम फाइनेंस मेनमेन और चीफ केमिस्ट मोनू भटनागर शामिल थे। टीम ने लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह तथा संस्थान के निदेशक प्रो. ध्रुवसेन से इसका प्रस्ताव देने को कहा है।