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LU:पीएचडी दाखिले में नेट-जेआरएफ और एमफिल वालों के लिए अलग नियम, पढ़ें यहां

Tue, 28 Aug 2018 04:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : amar ujala
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यूपी सरकार से मंजूरी मिलने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय में दो साल बाद पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया की तैयारी शुरू हो गई है। लविवि को यूजीसी के पीएचडी अध्यादेश-2016 के हिसाब से दाखिले करने होंगे। इसके मुताबिक नेट-जेआरएफ और एमफिल के अभ्यर्थियों को दाखिला देने के लिए अलग नियम बनाने होंगे।
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इन्हें सामान्य अभ्यर्थियों की तरह नहीं रखा जाएगा। अध्यादेश में इसके अलावा कई अन्य निर्देश भी दिए गए हैं जो पहले से अलग हैं। इसके अलावा एक हजार से अधिक सीटों पर प्रवेश दिया जा सकता है।
लविवि का ऑर्डिनेंस पास न होने की वजह से पिछले दो सत्र से पीएचडी के दाखिले नहीं हो सके हैं।

इस साल प्रदेश सरकार ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए यूजीसी अध्यादेश-2016 के हिसाब से पीएचडी दाखिले करने का शासनादेश जारी किया है। लविवि ने अपना पीएचडी ऑर्डिनेंस मंजूरी के लिए भेजा था। यूजीसी शासनादेश को पूरी तरह से लागू करने के आदेश के बाद अब विवि में बैठक कर नए सिरे से नियम तय करने हैं।
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यूजीसी पीएचडी अध्यादेश के बिंदु 10.2 के अनुसार महाविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग के शिक्षक, केंद्र-राज्य सरकार की प्रयोगशालाएं तथा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के शिक्षक ही पीएचडी कराने के लिए पात्र होंगे।
 

विभाग में एक शिक्षक तो नहीं करा सकेंगे पीएचडी

- फोटो : डेमो
लविवि ने इस साल अपने प्रस्तावित पीएचडी ऑर्डिनेंस में स्नातक में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी पीएचडी कराने का अधिकार दिया था। यूजीसी का अध्यादेश इससे अलग बात कह रहा है। ऐसे में लविवि को इस पर नये सिरे से निर्णय करना होगा।

बदलाव के बाद ये हैं मुख्य बिंदु :
- पीएचडी और एमफिल की सीटों का ब्योरा देते हुए कम से कम दो समाचार पत्रों में इसकी सूचना प्रकाशित करानी होगी। इसके साथ ही वेबसाइट पर भी ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य होगा।
- दाखिले प्रवेश परीक्षा के आधार पर होंगे, प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम 50 फीसदी अंक लाने होंगे। प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी सवाल शोध प्रविधि और 50 फीसदी विषय से संबंधित होंगे।
- पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन साल और अधिकतम छह साल की होगी। महिला और दिव्यांग शोधार्थियों को अधिकतम अवधि में दो साल की छूट प्रदान की जाएगी।
- महिला शोधार्थियों को 240 दिन का मातृत्व अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। 

यूजीसी के अध्यादेश में व्यवस्था दी गई है कि महाविद्यालय के परास्नातक विभाग में अगर सिर्फ एक ही शिक्षक हुआ तो फिर उसे पीएचडी कराने का अधिकार नहीं मिलेगा। पीएचडी कराने के लिए संस्थान में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर तथा प्रयोशालाएं दुरुस्त होनी चाहिए।
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इस साल होंगी एक हजार से ज्यादा पीएचडी सीटें

डेमो
नई गाइडलाइन के अनुसार एक प्रोफेसर एक समय में तीन एमफिल और आठ पीएचडी शोधार्थियों का गाइड बन सकता है। इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर एक समय में दो एमफिल और छह पीएचडी तथा असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए यह सीमा एक एमफिल और तीन पीएचडी शोधार्थियों की है। इससे अधिक विद्यार्थियों का गाइड बनाने की अनुमति अध्यादेश में नहीं दी गई है।

लविवि में इस साल पीएचडी सीट संख्या पिछले कई साल के मुकाबले इस बार सबसे ज्यादा होगी। यह संख्या एक हजार से भी अधिक हो सकती है। विवि में पिछली बार जब दाखिले हुए थे तो उस समय छह सौ के करीब सीटें थीं।
 
दो साल के बाद दाखिले होने तथा डिग्री कॉलेजों के भी इसमें शामिल होने की वजह से यह संख्या निश्चित तौर पर बढ़ेगी। उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बताया कि यूजीसी के अनुसार राज्य के विश्वविद्यालयों  में एमफिल और पीएचडी की उपाधि प्रदान करने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई है। 

शासन से मंजूरी मिलने के बाद लविवि जल्द ही पीएचडी प्रवेश की प्रकिया शुरू करेगा। कुलपति शहर से बाहर गए हुए हैं। उनके वापस आने पर बैठक करके पीएचडी गाइडलाइन जारी की जाएगी। - ं
प्रो. एनके पांडेय, प्रवक्ता, लविवि
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