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बीबीएयू रजिस्ट्रार की नियुक्ति निरस्त, जारी किया आदेश

Wed, 18 Oct 2017 12:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में कुलपति प्रो. आरसी सोबती और रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा के बीच लगभग तीन साल से चल रही खींचतान में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। कुलपति ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए रजिस्ट्रार की नियुक्ति निरस्त कर दी।
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इसके साथ ही उन्हें अपने मूल संस्थान बीएचयू में जॉइन करने को भी कहा है। वहीं इसके साथ ही मंगलवार से विश्वविद्यालय में सात दिन का अवकाश हो गया। विश्वविद्यालय में पिछले तीन दिनों से यूजीसी की विशेष शैक्षणिक, वित्तीय, प्रशासनिक ऑडिट टीम आई हुई थी।

इस टीम के सामने भी कुलपति और रजिस्ट्रार के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। यूजीसी टीम सोमवार शाम को वापस लौटी और मंगलवार सुबह ही कुलपति प्रो. सोबती ने रजिस्ट्रार को हटाने का आठ पेज का भारी-भरकम आदेश जारी कर दिया। इस आदेश की जानकारी विश्वविद्यालय में थोड़ी ही देर में हर किसी को हो गई और इस निर्णय पर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई।
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कुलपति ने अपने आदेश में रजिस्ट्रार की नियुक्ति से लेकर अब तक हुए पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) की बैठक के निर्णय के अनुसार रजिस्ट्रार प्रतिनियुक्ति पर नहीं बल्कि एक तय समयावधि (टेन्योर) के आधार पर नियुक्त हो सकता है।

इसके लिए उन्हें समय भी दिया गया और 04 अक्तूबर 2017 को शो-कॉज नोटिस भी। किंतु उन्होंने बीएचयू से इस्तीफा देकर टेन्योर आधार पर नियुक्ति का कागज नहीं प्रस्तुत किया। इसे देखते हुए उनकी नियुक्ति निरस्त की जाती है। 

प्रो. राम ने संभाला कार्यभार

डेमो - फोटो : डेमो
कुलपति के प्रतिनिधि व विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. आरबी राम ने मंगलवार को तुरंत रजिस्ट्रार का चार्ज भी ले लिया। जबकि निवर्तमान रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा अपने कार्यालय नहीं पहुंचीं। कुलपति ने अपने आदेश में रजिस्ट्रार का चार्ज लेने के साथ ही नए रजिस्ट्रार की नियुक्ति का विज्ञापन भी जारी करने का निर्देश दिया है।

प्रो. राम ने कहा कि विज्ञापन तैयार करवाने में थोड़ा समय लगेगा। जल्द ही नए रजिस्ट्रार का विज्ञापन जारी किया जाएगा। रजिस्ट्रार ने कुलपति द्वारा जारी आदेश को लेकर सभी बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बॉम) के सदस्यों को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि बीबीएयू एक्ट 1994 के सेक्शन 12 (3) का कुलपति ने गलत इस्तेमाल कर उन्हें प्रताड़ित किया है।

उन्होंने कहा है कि सेक्शन 12 (3) का प्रयोग किसी आपात परिस्थितयों में किया जा सकता है। इसके मनमाने इस्तेमाल से बड़ी गंभीर प्रशासनिक समस्या पैदा हो सकती है। इसका प्रयोग तभी किया जा सकता है, जब बॉम की बैठक भविष्य में न होने की कोई संभावना हो।

अब विवि में अवकाश है और 23 को ही बॉम की बैठक होनी है। उन्होंने ये भी कहा है कि 22 जुलाई को हुई बॉम की बैठक के मिनट्स अब तक स्वीकृत नहीं हुए हैं। कुलपति ने इसे खुद स्वीकृत कर उन्हें हटाने का आदेश जारी कर दिया है।

 
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सात दिन का अवकाश, 23 को बॉम

डेमो
रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा की नियुक्ति निरस्त करने का आदेश मंगलवार को जारी किया गया। बुधवार से विश्वविद्यालय में दिवाली की छुट्टियां हैं। वहीं सोमवार और मंगलवार को भी अवकाश घोषित किया गया है। जबकि इसी बीच 23 अक्तूबर को बॉम की बैठक भी प्रस्तावित है।

 इसमें कुलपति इस आदेश का अप्रूवल लेने की कोशिश करेंगे। कुलपति के प्रतिनिधि व कार्यवाहक रजिस्ट्रार प्रो. आरबी राम ने बताया कि यूजीसी टीम के निरीक्षण के दौरान शनिवार-रविवार को विवि खोला गया था। इसी के एवज में 23-24 को अवकाश घोषित किया गया है।

विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी हनुमइया के समय में 42 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। 2013 में सुनीता चंद्रा रजिस्ट्रार बनीं। शिक्षकों की नियुक्ति व कुछ अन्य मुद्दों पर कुलपति प्रो. सोबती व रजिस्ट्रार के बीच 2014 में ही खटास शुरू हुई।

इसके बाद किसी न किसी मुद्दे पर दोनों के बीच नोकझोंक व पत्राचार चलता रहा। बॉम की बैठक में भी एक-दो बार दोनों के बीच नोकझाेंक हुई। दो दिन पहले यूजीसी टीम के सामने भी कुलपति-रजिस्ट्रार के बीच बहस हुई थी।
 
कुलपति द्वारा जारी आदेश नियमों के खिलाफ है। उन्होंने बार-बार मुझे प्रताड़ित करने का काम किया है। मंत्रालय द्वारा 2001 में जारी निर्देश में स्पष्ट है कि इसका प्रयोग कहां और किन परिस्थतियों में करना है। पिछली बॉम के मिनट्स स्वीकृत कराए बिना उसके आधार पर कुलपति कैसे कोई निर्णय ले सकते हैं। - सुनीता चंद्रा, रजिस्ट्रार

विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियमों और विश्वविद्यालय एक्ट के अनुसार कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए रजिस्ट्रार की नियुक्ति निरस्त की है। नियमानुसार रजिस्ट्रार की नियुक्ति डेपुटेशन पर नहीं टेन्योर आधार पर ही हो सकती है। बॉम ने भी पिछली बैठक में यही निर्णय लिया था। - प्रो. गोविंद पांडेय, पीआरओ

 
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