लखनऊ। ठाकुरगंज क्षेत्र में अवैध रूप से रह रही बांग्लादेशी महिला नरगिस अख्तर 10 वर्ष पहले टूरिस्ट वीजा पर आई थी। इसकी अवधि खत्म होने के बाद वह वापस नहीं गई। आरोपी हरिओम आनंद से दूसरी शादी कर वह निर्मला देवी बन गई। हरिओम आनंद ने ही उसके फर्जी दस्तावेज बनाए थे। एटीएस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी हरिओम ने नरगिस की तरह कई बांग्लादेशी महिलाओं के भी भारतीय पहचान के फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं।
ठाकुरगंज थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक एटीएस को बांग्लादेशी महिला नरगिस अख्तर के बारे में गोपनीय जानकारी मिली थी। सर्विलांस की मदद से पता चला कि नरगिस ने निर्मला देवी के नाम से फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं और बरौरा में किराये के मकान में रहती है। उसने काकोरी के अमेठी सलेमपुर गांव निवासी समीर से भी शादी की है। इसकी तस्दीक होने के बाद यूपी एटीएस की टीम ने निर्मला और समीर को 28 नवंबर को अपने दस्तावेज के साथ पूछताछ के लिए एटीएस मुख्यालय बुलाया।
दोनों ने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2024 में हुई है। दोनों का एक वर्ष का बच्चा भी है। समीर ने बताया कि निर्मला मूल रूप से पश्चिम बंगाल की है। निर्मला ने बताया कि उसके पिता का नाम शिवगुलाम है और मायका आशियाना के सेक्टर-1 में है। उसने मोबाइल में अपना आधार कार्ड भी दिखाया।
माता-पिता का जन्म स्थान पूछा गया तो टूट गई
एटीएस ने जब निर्मला से उसके माता-पिता व संबंधियों के जन्मस्थान के बारे में सवाल करना शुरू किया तो वह चुप हो गई। इसके बाद जब उसके मोबाइल फोन को चेक किया गया तो कई बांग्लादेशी नंबर और वहां का निवास प्रमाणपत्र व अन्य कई दस्तावेज मिले। इसके बाद उसने अपनी असलियत कबूली।
वर्ष 2022 में आरोपी हरिओम से की थी शादी
नरगिस ने बताया कि लखनऊ आने के बाद वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात बलिया निवासी हरिओम आनंद से हुई थी। वह मौजूदा समय में गोसाईंगंज के रसूलपुर बेगरिया इलाके में रहता है। उसने ही नरगिस के सारे फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। इसके बाद आरोपी ने नरगिस से शादी भी कर ली थी। इस दौरान हरिओम ने उसके नाम से बैंक ऑफ बड़ौदा और एचडीएफसी में दो खाते खुलवाए। बीओबी के खाते में हरिओम ने खुद को नॉमिनी बनाया और एचडीएफसी खाते में उसने अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराया था। वर्ष 2023 में हरिओम ने नरगिस को एक स्कूटी व कार भी खरीद कर दी थी।
हरिओम ने कई बांग्लादेशी महिलाओं के फर्जी दस्तावेज बनवाए
नरगिस ने इस बात का भी खुलासा किया कि हरिओम आनंद ने उसकी तरह ही कई बांग्लादेशी महिलाओं के फर्जी पहचान पत्र बनवाए हैं। आरोपी हरिओम ने बताया कि वह वर्ष 2012 में बलिया से लखनऊ आया और गोसाईंगंज में साथी उदल के घर पर रहने लगा।
ये सामान आरोपियों के पास से मिला
तीन पैन कार्ड, एक निवास प्रमाणपत्र, एक आय प्रमाणपत्र, दो आरसी, दो फर्जी आधार कार्ड, दो बैंक की पासबुक, चार चेकबुक, चार डेबिट कार्ड, एक राशन कार्ड, पासपोर्ट, डीएल और निर्वाचन कार्ड की फोटो कॉपी, तीन मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड मिले हैं।
ठाकुरगंज पुलिस, एटीएस और खुफिया एजेंसियां आरोपी हरिओम आनंद के पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगा रही हैं। जिन बैंक खातों के बारे में आरोपियों से जानकारी मिली है उनकी भी डिटेल खंगाली जा रही है। आरोपी नरगिस और हरिओम के संपर्क में आए लोगों के बारे में भी उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से पता लगाया जा रहा है। -विश्वजीत श्रीवास्तव, डीसीपी पश्चिम
हरिओम आनंद व नरगिस अख्तर।