प्रदेश के विभिन्न विभागों से सीएजी चिट्ठी-पर-चिट्ठी लिखकर खजाने से खर्च सैकड़ों अरब रुपये का हिसाब-किताब मांग रही है लेकिन अफसर जवाब देने के नाम पर चुप्पी साधे बैठे हैं।
हैरानी वाली बात ये है कि मुख्यमंत्री के अधीन वित्त महकमे की बार-बार लिखा पढ़ी का भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
सरकारी विभागों को बजट खर्च के बाद उसका उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) देना होता है। जैसे-जैसे खर्च होते रहते हैं, वैसे-वैसे यूसी देनी होती है। महालेखाकार बजट और खर्च का तिमाही मिलान करते हैं।
मगर, गौर करने वाली बात ये है कि महालेखाकर इलाहाबाद को कई विभागों ने 2001-02 से ही खर्च रकम का हिसाब नहीं दिया। 31 मार्च 2013 को समाप्त वर्ष पर आधारित सीएजी की रिपोर्ट को आधार मानें तो 2,93,824 उपयोगिता प्रमाणपत्र सीएजी को नहीं मिले।
इनमें 66,625 करोड़ रुपये की रकम शामिल है। इन लंबित उपभोग प्रमाणपत्र में 2001-02 से लेकर 2012-13 तक के आंकड़े शामिल थे।
कई चेतावनियों के बाद भी जवाब नहीं
सीएजी ने पिछले महीने फिर बकाया यूसी के लिए सरकार को खत लिखा, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात।
इस मामले पर मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि बजट खर्च करने के बाद महालेखाकर कार्यालय में उसका उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर समायोजन करना आवश्यक होता है।
यूसी भेजना विभागों की जिम्मेदारी है। इतनी बड़ी मात्रा में रकम की यूसी लंबित होना ठीक नहीं है। जल्दी ही पता करेंगे कि यूसी क्यों नहीं जा पा रही है। यदि कोई जान बूझकर इसमें लापरवाही करता मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
सीएजी अनावर्ती सहायता अनुदानों के खर्च की यूसी के लिए प्रदेश के वित्त विभाग से लगातार लिखा पढ़ी कर रही है।
प्रदेश का वित्त महकमा भी सीएजी की चिट्ठी आते ही समस्त प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों व कार्यालयाध्यक्षों को अपने स्तर से चिट्ठी जारी कर देता है।
दिनोंदिन बढ़ती जा रही है सूची
समय से यूसी का मिलान कराने की चेतावनी जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरा कर देता है। मगर, सालों से हो रही खतो-किताबत की हकीकत ये है कि लंबित यूसी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है, जिम्मेदार अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
वित्त विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भटनागर का कहना है कि महालेखाकार को उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के कई मामले काफी पुराने हैं।
लंबित मामलों की समीक्षा के लिए एक बैठक बुलाई गई है। इसमें विभागवार स्थिति की समीक्षा की जाएगी। प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाएगी।
इन विभागों को देना है हिसाब किताब
महिला कल्याण, समाज कल्याण, प्राविधिक शिक्षा, उच्चशिक्षा, सैनिक कल्याण, पंचायतीराज, पर्यटन, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, दुग्ध विकास, आयुर्वेदिक सेवाएं, सूचना विभाग, समाज कल्याण (जनजाति) और अल्पसंख्यक (राज्य हज समिति) की यूसी बकाया हैं।